Page
घोषणा पत्र
भारत महापरिवार पार्टी राजनीति में एक नई परंपरा का आगाज करने जा रही है जिसका लक्ष्य राजनीतिक सुधार एवं सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के साथ देश में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित करना है। क्योकि हम एजेंडा नही, समाधान नीतियों को जनता के समक्ष प्रस्तुत कर रहे है। हम वादा और हम यह करेंगे, हम वह करेंगे जैसे एजेंडों को नही बताने जा रहे है। हम यह इरादा रखते है कि इसे हम कैसे करेंगे। पार्टी ने कई वर्षो के अपने सामाजिक रिसर्च और तमाम जनता से जुडें मामलों पर अध्ययन के बाद अपनी समाधान नीतियों का विस्तृत विवरण जनता के समक्ष अपनी वेबसाईट के माध्यम से प्रसारित कर रखा है। हम आपके समक्ष कुछ लाभ और नीतियों के सुक्ष्म विकल्प को बताने जा रहे है जो हमारा घोषणा पत्र है:- सर्वप्रथम हमने पहचान मामले को सशक्त बनाने का संकल्प लिया है जिसे हमने भारतीय पहचान संख्या नाम दिया है एक भारतीय एक पहचान! के रूप में स्थापित करना और इस पहचान संख्या पर विभिन्न प्रकार के लाभ एवं सेवाए प्रदान करना। जिससे तमाम फर्जी मामलों का अंत किया जा सकें और देश की जनता को सरकारी मकड़जाल से मुक्ति मिल सकें। हमारी सरकार जनसंख्या नियंत्रण के लिए दृणसंकल्पित है देश में रहने वाले सभी धर्म समुदाय को परिवार नियोजन का पालन करना अनिवार्य है, हमारे सभी लाभ एक परिवार के दो बच्चों या परिवार में 3 बच्चीयों को ही दिया जाएगा। परिवार के मुखिया द्वारा 2.50 लाख वार्षिक आय प्राप्त करने वाले सभी परिवारों को देश के किसी भी निजी/ट्रस्ट एवं सरकारी चिकित्सलयों में 10 लाख रूपए की निःशुल्क चिकित्सा लाभ दिया जाएगा और यात्रा के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को 15 लाख तक का दुर्घटना लाभ दिया जाएगा। इन लाभों के लिए सरकारी तंत्र के चक्कर नही लगाने होंगे। श्रमिक को रोजगार एवं स्वरोजगारः हमारी सरकार रोजगार के आधुनिक प्रबंधन प्रणाली पर काम करेगी। प्रथम देश के युवाओं को यह ज्ञात होगा कि किसी विभाग में कितना पद रिक्त हो रहा है। दूसरा आवेदन के लिए केवल भारतीय पहचान पुष्टि के साथ अपना शिक्षा आईडी भरना होगा। तीसरा गृहजनपद को ही परीक्षाओं केन्द्र बनाया जायेगा और मौखिक परिक्षा ऑनलाइन काॅनफ्रेन्स द्वारा करायी जाएगी। जिसका परिणाम त्वरित होगा। देश के विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाए है हमारी सरकार उन्हें बढ़ावा देने हेतु आधुनिक प्रबंधनों द्वारा रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराएगी। जिसके कुछ विकल्प आपके साथ साझा कर रहे हैः- हमारी सरकार हर उन सम्भावनाओं को आधुनिक बनाकर रोजगार एवं स्वरोजगार प्रदान करेगी जिससे देश की बेरोजगारी का अंत किया जा सकें। हमारी सरकार की योजनाए प्रति व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने एवं देश आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कार्य करेगी। हमारा ल़क्ष्य देश की रेल व्यवस्थाओं में अमूलचूक परिवर्तन के साथ एक आधुनिक प्रणाली विकसित करना है और देष के सभी रेल लाइनों को कम से कम 300 किमी प्रतिघंटा मानको के आधार पर निर्माण कराना, 6 लेेन लाइनों का जाल बिछाना, स्टेशनों को आधुनिक व्यवस्थाओं से युक्त करना। जिससे यात्री को हर सुविधाए प्राप्त हो सके। नए प्लेटफार्मो का निर्माण करना एवं विस्तार करना। तथा आनरक्षित सीटों को भी आरक्षित किया जाएगा साथ ही यात्री रेल यात्रा के दौरान रिक्त सीटों के स्थिति पता कर सकेगा और टिकट ले सकेगा। विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। हमारी पार्टी आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए दृणसंकल्पित है। नागरिक के आर्थिक स्थिति का प्रबंधन हम भारतीय पहचान संख्या के आधार पर करेंगे। जिससे हर परिवार और व्यक्ति का आर्थिक आकलन और स्थिति की पुष्टि करना आसान होगा। जिस आधार पर वर्तमान में जो आरक्षण मानक दिया गया है उसे प्रदान किया जायेगा। इस प्रक्रिया के लिए नागरिक को सरकारी तंत्र के ना तो चक्कर लगाने होगें और ना ही कोई प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होगी। हम देश की ऐसी समाधान नीति पर कार्य कर रहे है जहाँ आरक्षण को कोई मतलब नही रह जायेगा। हम आरक्षण के विरोध में नही है न ही मै आरक्षण को सही मानते है मेरा प्रथम सिद्धात यही है भूखे को दो वक्त का भरपेट खाना, रहने के लिए मकान, पहनने के लिए अच्छे कपड़े, तथा नौकरी और काम। जिससे वह व्यक्ति स्वयं स्वावलंम्बी बनकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। जब मेरा यह सिद्धात समातामूलक हो जाएगा। तो लोग स्वतः ही आरक्षण जैसे शब्द ही भूल जाएगें। भारतीय पहचान संख्याः- भारत के नागरिको के लिए एक सशक्त पहचान प्रणाली विकसीत करना, जिससे देश के नागरिकों को छोट-छोटे कार्यो जैसे पहचान पत्रों, प्रमाण पत्रों, आवेदनों की पुष्टि हेतु लोगों को सरकारी मकड़जाल और फर्जीवाडे से मुक्ति दिलाना। इस प्रणाली द्वारा हम आंतरिक सुरक्षा और बहारी सुरक्षा पर पूर्ण नियंत्रण रख सकेगें। विस्तृत जानकारी के लिए वबसाइट देखें। लाइव ईवीएम:- वर्तमान ईवीएम को समाप्त कर लाइव ईवीएम लाना होगा। जिससे देश में मतदान एवं मतगणना एक साथ हो सकें। लाइव ईवीएम हाने से मतदाता अपने बूथ क्षेत्र से बाहर होने की दशा में भी मतदान कर सकेगा। फर्जी मतदान पूणतः समाप्त हो जाएगा 18 वर्ष के उपर के सभी मतदाता अपना वोट कर सकेगें। मतदाता को इसके लिए किसी प्रकार का पर्ची और नाम की लिस्ट देखने की कोई आवश्यकता नही होगी। लाइव ईवीएम द्वारा हम प्रत्येक मतदाता योग्यता को नियंत्रण कर सकते है जैसे अपरािधयों के मतदान एवं परिवार में 2 बच्चों को मतदान का अधिकार आदि का नियंत्रण किया जा सकेगा। लाइव ईवीएम होने से देश में मतदान व्यवस्था में जुड़े सैनिक, पुलिसबल, अधिकारी, कर्मचारी, प्राईवेट कम्पनीयों के आफिसर रैंक के लोगों को तथा सामाजिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों को मोबाईल द्वारा मतदान का अधिकार दिया जायेगा। जिससे देश में मतदान का प्रतिशत ?? हमारा संकल्प अयोध्या को पुनः भारत एवं अवध प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाना? यह निर्णय लेने का तीन मत्वपूर्ण कारण है जो तीन कथनों के अस्तित्व से जुड़ा है, जो आप सभी लोग अकसर सुनते आये है कि भारत विश्वगुरु था? रामराज्य यही था ? सोने की चिड़िया कहा जाता था? जब हमने इन तीनों कथनों के अस्तित्व को ढूढने का प्रयास किया, तो हमें ज्ञात हुआ कि इन तीनों कथनों का अस्तित्व अयोध्या भूमि से जुड़ा है। जो भारत ही नहीं, अपितु पुरे विश्व की सबसे पहली संस्कार और संस्कृति की जन्म भूमि है, जो गुरुओं और महात्माओं की भूमि है, जहाँ का कण कण दिव्य और देवतुल्य है, जहाँ भाइयों के अटूट प्रेम सेवा, त्याग की गाथा आज भी लोगों को मर्यादा और संस्कार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है, जो एक आयुद्ध भूमि है । क्योंकि अयोध्या भूमि से जुड़ी संस्कार और संस्कृति आज भी जीवन मूल्यों, आदर्शों, के साथ साथ प्रेम, सेवा, त्याग का उत्तम उदाहरण देता है और पूरी मानवता को कहीं न कही उत्तम जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है । इसलिए मेरा यह भी मानना है कि आज हम केवल यहीं से अपने आने वाली पीढ़ी को जीवन जीने का उत्तम उदाहरण दे सकते है। जहाँ तक बात है इसकी प्रमाणिकता कि तो अयोध्या पूरे पृथवी की सबसे पहली राजधानी भी रही । युगों युगों से सम्पूर्ण अखंड भारत वर्ष की राजधानी रही। मुगल काल मे भी अवध प्रान्त की राजधानी रही , जिसके तमाम प्रमाण पुराणों और इतिहास में मिल जायेंगे। इन्हीं सभी बातों से प्रेरती होकर हमने यह निर्णय दृष्टिकोण से लिया है, मेरा यह मानना है कि दृष्टि से दिखाई देने वाला हर तथ्य सत्य नहीं होता। जैसा कि आपने देखा होगा कि चंद पैसों की लालच में आकर सागा भाई भी आपका विरोधी हो जाता है, लोग अपने माता-पिता की सेवा करने के वजाय उन्हें घर से निकाल देते है, अपनी बेटी जैसी बहु को जिंदा जला दे रहे है, जाति/ धर्म तो दूर का विषय है । दृष्टिकोण यह कहता है कि 3500 वर्ष पूर्व तक पूरी दुनिया में कोई दूसरा धर्म नही था, अगर नही था, तो हम सब एक ही सनातन संस्कृति को मनाने वाले लोग है। आज भले ही हमसब पृथक पृथक धर्म और जाति में बट गए है, अगर देखा जाए तो हम सब एक ही है । मेरा मतलब यहाँ सिर्फ इतना है कि चाहे हिन्दू हो मुसलमान, सिख हो ईसाई जिस भी धर्म को मनाने वाला है, वह अपने बच्चे को जीवन जीने का उत्तम उदाहरण ही देता है और मानव मर्यादा के साथ जीवन जीने का सबसे उत्तम उदहारण अयोध्या भूमि के अलावा पूरी दुनिया के किसी भूमि से नही मिलता । इसलिए मैंने यह संकल्प लिया है। अवध प्रदेश क्यों ? वर्तमान में उत्तर प्रदेश को ४ भागों में बांटने की मांग उठ रही है। इसलिए हमने उत्तर प्रदेश को दो भागों में बांटने का निर्णय लिया है, पहला अवध प्रदेश/प्रान्त दूसरा ब्रज प्रदेश/प्रान्त। जो भारतीय सांस्कृतिक एवं धरोहरों का पूरा इतिहास है। अवध प्रान्त जिसमे पूर्वांचल के सभी जिले आएंगे, जिसकी राजधानी अयोध्या होगी, यह इसलिए कि यह कभी बहुत बड़ा प्रान्त हुआ करता था, जो बिहार यानी मगध और नेपाल के सीमा तक फैला था, इस प्रकार अयोध्या भारत और अवध प्रदेश की एक संयुक्त राजधानी होगी, जिसकी हम पूरी रूपरेखा बना चुके है, हमें इस प्रस्ताव पर जनता का समर्थन चाहिए। अवध प्रदेश में हमने लखीमपुर हरदोई से लेकर ललितपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र तक के जिलों को शामिल किया है इसमें कुल 46 ज़िला आएगा। यह इसका नक्शा है : सवा सौ करोड़ भारतीयों के मन में देश और जनता की समस्याओं से जुड़े प्रश्न जिनके समाधान के लिए भारत महापरिवार पार्टी ला चुकी है समाधान! क्या है विश्वगुरु की परिकल्पना ? आपने अक्सर सुना होगा कि राष्ट्रीय पार्टिया भारत को विश्वगुरु बनाने की बात करती है, खासकर बीजेपी इस शब्द का उपयोग राजनीती में ज्यादा करती है। आपको बताना चाहता हूँ कि हम भारत के लोग अपनी संस्कृति से जुड़े हुए ज्ञान को एक संगठित विचारधारा का रूप देते है, जिससे सभी को सम्मान मिले और एकता के स्वरूप में लाया जा सके। जिससे हमारे अंदर उत्तम आचार, व्यवहार और संस्कारों का सृजन होता है, इसलिए हम दुनिया में पहले संस्कारों के साथ जीवन जीने वाले लोग है। इसलिए हम कण-कण के उपभोग के लिए कृतज्ञता व्यक्त करते है और पूजते भी आये है। यही कारण है कि पूरी धरती को माँ मानते आए है और विश्व को परिवार जिसके कल्याण की कामना हम आज भी करते है। परन्तु आज हम संस्कार विहीन होते जा रहे है, हम शिक्षा और ज्ञान के अंतर् को समझ नहीं पा रहे है और वैमनष्यता की भावना घर करती जा रही है, जिसे कुछ राजनितिक दल इन भावनाओं से खेलने का काम कर रहे है, जो कि वास्तविकता से कोसो दूर है। हम सनातनी लोग कुछ पुरोधाओं के कहने पर गर्व करने के वजय अहंकार में अपने ही संस्कृति का नाश करते जा रहे है। दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम का ज्ञान देने वाला भारत। आज भी ऊंच नीच की मानसिकता से बहार नहीं आ पाया, आज भी तमाम हिन्दू समाज के लोग अपने ही समाज के लोगों को अपमानित करते है उन्हें पूजा-पाठ करने तक से रोका जाता है। जिसका फायदा दूसरे धर्म के लोग उठाते है, जिस कारण से हम अपनी मूल संस्कृति को नष्ट करने में लगे है, जबतक हम अपने अंदर भेद भाव की भावना को नहीं मिटायेंगे, तब तक हमारे भावनाओं से मौका परस्त राजनितिक दल खेलते रहेंगे और हम भर्मित रहेंगे । क्या है रामराज्य की परिकल्पना ? आज वर्तमान राजनीती में यह शब्द खूब प्रयोग किया जा रहा है, क्या आपको पता है? कि रामराज्य किसे कहते थे? आपको पता होना चाहिए कि श्रीराम जी पहले ऐसे शासक थे, जिन्होंने सर्वप्रथम प्रजातंत्र की स्थापना किया था, जहाँ किसी प्रकार का कोई अपवाद न रहे, इसपर काम करते थे, जहां प्रजा की हर इक्छा राजा की इक्छा हुआ करता था। यह रामराज्य की वास्तविक अर्थ है । परन्तु आज वास्तव में प्रजातंज़ है और रामराज्य का दम्भ भरने वाली बीजेपी सरकार है, लेकिन आज आप देख रहे है, किसान १ साल से सड़कों पर मर रहा था देश खड़ी की गई स्थाई संपत्ति को गिरवी रखकर, किराये पर देकर देश को चलाने की जुगत लगाई जा रही है, जनता कुत्तों बिल्लियों की तरह मारी जा रही है, आय से ज्यादा टैक्स और जुर्माना वसूलकर जीडीपी बढ़ाई जा रही है, केवल सत्ता पाने के लिए औरतों का चीरहरण हो रहा है। अगर इसे रामराज्य कहेंगे है? तो आपसब श्रीरामजी का और रामराज्य शब्द का भी अपमान कर रहे है। क्या है सोने की चिड़िया बनाने की परिकल्पना ? आज़ादी के ७५ वर्ष बीत जाने के बाद भी हम विकासशील देश बने हुए है, जबकि चाइना भारत से २ दो वर्ष बाद आज़ाद हुआ और विकसित हो गया। आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन गया है और दुनिया का सबसे प्राचीनतम ज्ञान रखने वाला भारत। आज चंद नेताओं द्वारा फैलाये गए जातिवाद, धर्मवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद की राजनीती में फंसा हुआ है। हम आजतक प्रतिव्यक्ति विकास का लक्ष्य नहीं तय कर पाए। हम जनसख्या आंकड़ों के हिसाब से देश के संसाधनों को सुनिश्चित नहीं कर पाए, आज भी इनपर राजनीती करके वोट माँगा जाता है। पिछली सरकार ने कोई योजना लाई तो दूसरी सरकार आने पर उसे रोकेगी। आज भी हमें किसी प्रकार का व्यवसायिक लाइसेंस या परमिशन लेना हो तो कई साल लग जाते है। नियुक्तियों का निर्धारण आज भी भ्रष्टाचार का शिकार है। भारत के युवाओं के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें छोटी छोटी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आज भी हम एक खरीदार बनकर रह गए है जबकि चाइना एक सफल क्रिएटर की भूमिका में आ चूका है। आज भी तकनीकी के मामले में हम बहुत पीछे है और दूसरों की तकनिकी का इस्तेमाल कर रहे है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान बीजेपी सरकार स्थाई संपत्ति को गिरवी रखकर और किराये पर देकर देश की जीडीपी को बढ़ने की जुगत लगा रही है। आप चिंतन कीजिए घर को किराए पर चढ़ाकर क्या आप आर्थिक संपन्न बन पाएंगे ? हम निजीकरण की तुलना अमेरिका से कर रहे है, आप सोचिये अमेरिका की प्रतिव्यक्ति वर्तमान आय 65000 डॉलर प्रतिवर्ष है और भारत की औसतन आय एक दिन के सौं रुपए भी नहीं । आज हमे आरक्षण और सरक्षण दोनों की जरुरत है। लेकिन आज ही हम अपनी संपत्ति को गिरवी रख देंगे, तो सरकार कैसे आर्थिक रूप से कमजोर जनता के लिए मददगार साबित हो पायेगी? क्या आपको नहीं लगता है कि इस निजीकरण नीति से सरकार पूंजीपतियों की गुलाम बनकर रह जाएगी? क्योंकि निरंकुश शासन किसी भी देश के लोकतंत्र के लिए घातक है, जिस नीति को हम 200 साल भोग भी चुके है, पहले अंग्रेजों के थे, अब अपना कहने वालों के, लेकिन मानसिकता में कोई बदलाव नहीं है, जिसपर हमें आज चिंतन करना होगा ? क्या है राष्ट्रवाद का मूल। राष्ट्र का तात्पर्य संस्कृति से होता है, यह सर्विदित है कि भारत की संस्कृति, तमाम संस्कृतियों की जननी है और दुनिया की सबसे श्रेठ संस्कृति है, जहाँ कण-कण को श्रद्धा भाव से देखने और पूजने की परंपरा रही है। इसलिए हम बसुधैव कुटुम्बकम और सम्पूर्ण धरती को माँ के रूप में मानते और पूजते आये है, जिनसे मानव में एक उत्तम संस्कार का जन्म होता है। परन्तु आज हम भ्र्म रुपी राजनीती का शिकार होते जा रहे है और हम सत्य से दूर होते जा रहे है। जबकि हमारे धर्मशस्त्र का यह श्लोक हमारी विचारधारा की पहचान करता है : ( यं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद्, अध्याय ४, श्लोक ७१), अर्थ - यह अपना है और यह दूसरे का है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है। परन्तु वर्तमान राजनीती इस विचारधारा को बदल कर संकुचित विचारधारा के आधार पर काम कर रही है, इसलिए हमारी छोटी मानसिकता ही भूभाग को राष्ट्रवाद से जोड़कर संकुचित और खंडित करने का काम कर रही है। आज हम झूठे राष्ट्रवाद के भ्र्म में आकर स्वयं की विचारधारा को छोटा और संकुचित करते जा रहे है। जबकि सत्य यह है कि राष्ट्र ही संस्कृति है और संस्कृति किसी भूभाग के बंट जाने पर समाप्त नहीं होता है, बल्कि यह बंटे हुए भूभाग को एक करने का काम करती है। आज हमे उन लोगों का ऋणी होना चाहिए, जो भारत की संस्कृति से जुड़े संस्कार को दुनिया के विभिन्न देशों में रहकर संजोए हुए है। जो पुनः भारत को अखंड भारत बनाने की एक कड़ी है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि अच्छे लोगों के लिए पूरी दुनिया में रहने के स्थान है, लेकिन बुरे व्यक्ति के लिए स्वयं के घर में भी स्थान नहीं मिलता। जहाँ तक बात है, एक छोटे भूभाग को राष्ट्र से जोड़ना ,तो आप जाने अनजाने राष्ट्रवादी विचारधारा को खंडित करने का काम कर रहे है। आज हमें यह तय करना होगा कि हम राष्ट्र के लिए जी रहे है, या भारत के बांटे हुए छोटे से भूभाग के लिए। जिसका तात्पर्य देश की एक भगौलिक सीमा तक होता है, जो कमजोर होने पर गुलाम भी होता है और उसकी सीमाएं घटती भी है। इसलिए मेरा मानना है कि आज जो लोग दुनिया के कट्टर विचारों वाले देशों में जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि में संघर्षों के साथ जीवन यापन कर रहे है। उन्हें वापस बुलाना हमारा मकसद नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें संरक्षित करना हमारा मकसद होना चाहिए, हमे ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे वह सब सुरक्षित रह सके, वहाँ की राजनीती तंत्र का हिस्सा बन सके और वहां के तमाम क्षेत्रों में आप अपनी भूमिका तय कर सके। तभी हम अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को फैला पाएंगे और अखंड राष्ट्र बना पाएंगे। तभी हम विश्वगुरु की परिकल्पना को साकार कर सकते है। ऐसा नहीं कि यह हम अपनी राजनीति को चमकने के लिए ऐसा कर रहे है। आज के 3500 वर्ष पूर्व जब गुरु चाणक्यजी ने अखंड भारत की परिकल्पना किया था तब भी यहाँ की जनता भर्मित थी। लेकिन उन्होंने इस संकल्प को पूरा किया। हलाकि उस समय भूभाग को जीतकर उसे अपने अधीन मिलाने की परंपरा थी, लेकिन उस समय भी हमारा मकसद भारत की संस्कृति का फैलवा ही था , इसलिए गुरु चाणक्य जी ने चंदगत मौर्य की शादी सेल्यूकस की बेटी हेलन से कराया था, जिससे हमारी संस्कृति से जुड़वाँ बना रहे। क्या है हिंदुत्व का परिचय? आज जिस महान संस्कृति को आत्मसात करने वाले हिन्दुओं को स्वयं पर गर्व होना चाहिए है, वही हम एक संकुचित राजनीती के शिकार होते जा रहे है, जिनमे अहंकार बढ़ता जा रहा है। जिस कारण हम सब स्वयं के पतन का कारण बनते जा रहे है। हिंसा की निंदा करने वाला हिन्दू, आज हिंसक होता जा रहा है। आज हममें से कितने ऐसे लोग है, जो हिन्दू शब्द कहा से आया इसकी वास्तविक परिभाषा भी नहीं जानते है, वे गलत अवधारणा के शिकार हो रहे है और आज हिन्दू शब्द राजनीतिक दलों का अंग बनकर रहा गया। इस मामले में वर्तमान बीजेपी सरकार जैसे सर्टिफिकेट बाँट रही है, जैसा कि आज अभी देख रहे है, जो बीजेपी में नहीं है, वह राष्ट्रवादी और हिंदूवादी नहीं है। हम सक्षिप्त में हिन्दू और हिन्दुस्थान के सम्बन्ध में बताना चाहता हूँ : हमारे इतिहासकरों ने हिन्दू एवं हिन्दुस्तान नाम के विषय में बहुत से मत दिये है जिनमें बहुत सी भ्रांतियां है। लेकिन इन मतों से पहले हमारे प्राचीन ऋषियों ने हिन्दु एवं हिन्दुस्थान के विषय में तमाम साक्ष्य को प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित किया है। जैसे:- बृहस्पति आगम के अनुसार विशालाक्ष शिव द्वारा रचित राजनीति के महान शास्त्र का संक्षित महर्षि वृहस्पतिजी ने बार्हस्पत्य शास्त्र से किया। फिर वराहमिहिर ने एक शास्त्र लिखा जिसका नाम वृहत्संहिता है। इसके बाद वृहस्पति-आगम की रचना हुई। बृहस्पति आगम सहित अन्य आगम इरानी या अरबी सभ्यताओं से बहुत प्राचीनकाल में लिखा जा चुके थे। अतः उसमें हिन्दुस्थान का उल्लेख होने से स्पष्ट है कि हिन्दू या हिन्दूस्थान नाम प्राचीन ऋषियों द्वारा दिया गया था न कि अरबों/ईरानियों द्वारा। हिन्दू के प्रामाणिक श्लोक में कहा गया हैः- ऊँकार मूलमंत्राढ्यः पुनर्जन्म दृढाशयः गोभक्तो भारतगुरूः हिन्दुर्हिसनदूशकः। हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दुरितीरितः। ‘ऊँकार’ जिसका मूल मंत्र है, पुनर्जन्म में जिसकी दृढ़ आस्था है, भारत ने जिसका प्रवर्तन किया है तथा हिंसा की जो निंदा करता है, वह हिन्दू है। हिन्दुस्थान का प्रामाणिक श्लोक: हिमालयात् सभारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।। (बृहस्पति आगम) अर्थातः हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है। हिमालय से हिन्दूः एक अन्य विचार के अनुसार हिमालय के प्रथम अक्षर ‘हि’ एवं ‘इन्दु’ का अंतिम अक्षर ‘न्दु’। इन दोनों अक्षरों को मिलाकर शब्द बना ‘हिन्दू’ और यह भू-भाग हिन्दूस्थान कहलाया। ‘हिन्दू’ शब्द उस समय धर्म की बजाय राष्ट्रीयता के रूप में जब प्राकृत एवं उपभ्रंष शब्दों का प्रयोग साहित्यिक भाषा के रूप में हाने लगा, उस समय सर्वत्र प्रचलित ‘हिन्दू’ शब्द का प्रयोग संस्कृत गंथों में होने लगा। ब्राहिस्पत्य, कालिका पुराण, कवि कोष, राम कोष, मेदिनी कोष, शब्द कल्पद्रुम, मेरूतंत्र, पारिजात हरण नाटक, भविष्य पुराण, अग्नि पुराण और वायु पुराणदि संस्कृत गंर्थो में ‘हिन्दू’ शब्द जाति अर्थ में सुस्पष्ट मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन संस्कृत ग्रंथों के रचना काल से पहले भी ‘हिन्दू’ शब्द का जन समुदाय में प्रयोग होता था। वर्तमान बीजेपी सरकार ने राजनीती का इतना स्तर गिरा दिया है कि आज एक हिन्दू दूसरे हिन्दू को, इसलिए देशद्रोही बना देता कि वह उनकी नीतियों का विरोध करता है। आप बताइए भारत की संस्कृति का ज्ञान देने वाली पार्टी देशद्रोह शब्द किसके लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, यह तक भूल गई है। सत्ता के मद में इतने अंधे हो गए है, जो व्यक्ति बीजेपी का समर्थन नहीं करता है, उसे यह देशद्रोही और आंतकवादी बनाने में संकोच भी नहीं करते और वही व्यक्ति जब बीजेपी पार्टी के साथ जुड़ जाता है, तो वह राष्ट्रवादी हो जाता है। आज बीजेपी सरकार, प्रधानमंत्री पद की एक गरिमा और भाषा की मर्यादा तक भूल गए है, वह यह भी नहीं सोचते कि प्रधानमंत्री के हर एक शब्द को दुनिया के इतिहासकार टंकित भी करते है। क्या आपसब को नहीं लगता की जिन लोगों को देशद्रोही बनाया जा रहा है वह इस देश के नागरिक है? उनका विरोध केवल आपकी नीतियों से है, यह कहाँ तक न्यायसांगत है? क्या यह निम्नकोटि की विचारधारा नहीं है? और क्या आप इस निम्नकोटि की विचारधारा से विश्वगुरु, रामराज्य की परिकल्पना कर रहे है? मैं आपसे पूछना चाहता हूँ, आज जिन्हे आदर्श मानकर बीजेपी झूठे राष्ट्रवाद और हिन्दुत्ववाद का भ्र्म फैलाने का काम कर रही है, कभी आपने उन महान पुरुषों के विचार पर चिंतन किया? आपके समक्ष कुछ उदहारण रखता हूँ शायद आपकी आँखों पर पड़े भ्र्म का पर्दा हटे: आपको बताना चाहूंगा कि आज यह जो सारी लड़ाई चल रही है, वह पंथ को धर्म बनाकर कटटरता के साथ मानाने और मनवाने को ले करके है। अभी मैंने जितने महापुरुषों का नाम लिया, यह सभी दूसरे पंथों को मानाने वाले लोगों को, अपनाने वाले लोग थे। जिसका सीधा अर्थ था कि व्यक्ति चाहें किसी भी पंथ या धर्म को मानते हो अगर वह व्यक्ति भारत की संस्कृति से जुड़ी राष्ट्रवादी विचारधारा से सहमत है, तो उन्हें वह स्वीकार थे। लेकिन आज यह लड़ाई पंथ निरपेक्ष से धर्म निरपेक्ष हो चूका है और धर्मनिरपेक्ष से धर्म विशेष यानि कटटरता का रूप लेता जा रहा है, जो राष्ट्र के लिए घातक है। आप से कहना चाहूंगा कि आप वर्तमान बीजेपी की नीतियों पर चिंतन करें। आज स्वयं को सबसे हिंदूवादी कहने वाली सरकार हिन्दुओं के खतरे गिना रही है और हमे डरा रही है। हम यह तक भूल गए कि यह श्री राम और श्री कृष्ण की धरती है और पूरी दुनिया मे वीर पुरषों का प्रमाण कहीं मिलता है, तो वह सिर्फ भारत भूमि ही है। जहाँ पर शिवाजी, महाराणा प्रताप, लक्ष्मीबाई जैसे तमाम वीरों ने जन्म लिया। हम हौसलों से जंग जितने वाले लोग है और सवा लाख से एक लड़ाने वाले लोग है। हम कब से इतने कमज़ोर हो गए है? अगर ऐसा है तो हमे इस बीजेपी सरकार की नीतियों पर पुनः विचार करना होगा। जातिगत और धर्मगत राजनीती से जुड़े प्रश्न ? भारत २०० साल की गुलामी के बाद आज़ाद हुआ जहाँ हमे खुल का जीने और कुछ अच्छा करने की आज़ादी मिली। आज़ादी की घोषणा के बाद भारत को 565 रियासतों को एक करने की चुनौती को हमारे महान नेताओं सरदार बल्ल्भभाई पटेल जी, नेहरूजी, उनके सहयोगी बीपी मेनन ने दिनरात एक किया। जो जीवंत भारत का रूप बना। उसी भारत में सबसे पहले भाषावाद के आधार पर बाँटने वाले लोग खड़े हुए, आज क्षेत्रवाद का जहर घोला जा रहा है। जातिवाद अपने चरम पर आ चूका है, आज जातिवादी पार्टियों और संगठनो की एक बाढ़ आ चूका है। कुछ लोग जातिगत समस्याओं को गिनकर जातिगत, धर्मगत, क्षेत्रगत संगठन और पार्टिया खड़ी कर रहे है। परन्तु आप यह भी देख रहे है कि वही दल सत्ता में आने के लिए दूसरे दल के साथ गठजोड़ करते नजर आते है, तो क्या जातिगत, धर्मगत और क्षेत्रगत विचारों को मानाने वाले लोगों का हनन नहीं होता? इसलिए मेरा सभी देशवाशियों से अपील है कि कृपया इन बहकावे में न आये इनसे आपका विकास सम्भव नहीं हो सकता। आजतक इन दलों ने समस्याएं गिनाई है, उनके समाधान का एक भी प्रस्ताव नहीं रखा। आजतक अगर हर एक समस्याओं के समाधान पर काम हुआ होता, तो आज देश का हर व्यक्ति आर्थिक रूप से विकसित हो चूका होता, लेकिन आज देश की दशा और दिशा आपके सामने है। आपको बताना चाहता हूँ कि भारत महापरिवार पार्टी आपके हर एक मूल समस्याओं का समाधान बना चुकी है। उनसे से जुड़े कुछ प्रश्न जो आपके केवल मन में ही रह जाते थे उसे कोई दल सत्ता में आने के बाद पूरा नहीं करते बल्कि जो योजनाए लाते है उन्हें उस समाज के आर्थिक रूप से मजबूत लोग उठा लेते है और कमजोर आज भी वंचित है और उनमे इतनी खामिया है कि जमीनी स्तर पर जद्दोजहद करना पड़ता है। क्या आपको नहीं लगता है कि जातिवाद , धर्मवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद पर राजनीती करने वाली पार्टियाँ आपसी मतभेद और वैमनष्यता फैला रही है ? और अप्रत्यक्ष रूप से देश को तोड़ने का काम कर रहे है। जनता से जुड़े प्रश्न: समाधान विकल्प : भारत महापरिवार पार्टी अपने लक्ष्य राजनीतिक सुधार एवं संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के साथ राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत करने जा रही है। जहां हमारा मकसद "वादा" और "एजेंडों" आधारित राजनीती का अंत करना है और देश के प्रतिव्यक्ति विकास का लक्ष्य तय करना है। जो केवल और केवल समाधान की आधुनिक और पारदर्शी नीतियों से संभव है, जहाँ हर व्यक्ति का समय और धन को बचाया जा सकेगा, जिससे देश का विकास सुनिश्चित हो सके। जिसे भारत महापरिवार पार्टी समाधान के रूप में बना चुकी है, जिन आधारों पर हमने भारत महापरिवार पार्टी को देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसे आपके साथ और समर्थन की जरुरत है। आप हमारे तमाम समाधान नीतियों को हमारी वेबसाईट www.bharatmahaparivar.org पर जाकर पढ़ सकते है। समस्या? - समाधान? पहचान पत्र की समस्या? आज़ादी के ७५ वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक हम यह साबित करने में जुटे है कि हम इस देश के नागरिक है, क्योंकि जब भी हम सरकार के सेवा, सुरक्षा, व्यवस्था तंत्र से जुड़ते है, तो हमें स्वयं की पुष्टि बार-बार करानी पड़ती है, जिसके लिए हमें तमाम प्रकार के पहचान पत्र, प्रमणपत्र, दस्तावेज बनवाने पड़ते है, जिसके जंजाल से बचने के लिए, हम दलाल से जुड़ते है, कर्मचारी अधिकारी को रिस्वत देते है, जहाँ से भ्रष्टाचार की शुरुआत होती है। समाधान? भारत महापरिवार पार्टी, भारतीय पहचान संख्या के रूप में एक ऐसे पहचान प्रणाली को विकसित किया है जो एक सशक्त नागरिक पहचान पुष्टि होगा। जिसके आने पर देश की जनता को जन्म, मृत्यु, जाति, निवास, आय, मतदाता कार्ड, राशनकार्ड, पैन कार्ड, आधारकार्ड किसी प्रकार का लाइसेंस आदि बनवाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। कृषि क्षेत्र में समस्या: आजतक भारत सरकार कृषि और किसानों के स्पष्ट आकड़े नहीं जुटा पाई। जिस कारण से आज कृषि क्षेत्र में तमाम समस्याएं बनी हुई है। जैसे उर्बरक और बीज समय से उपलब्ध न होने की समस्या। फसल नष्ट होने पर समय से मुवाबजा न मिलने की समस्या। फसल अधिक हो जाये तो भण्डारण की समस्या। उचित और निर्धारित मूल्य न मिलाने की समस्या। जैसी तमाम छोटी बड़ी समस्याए आज भी बनी हुई है। समाधान : हम पहचान संख्या से यह स्पष्ट कर लेंगे कि देश में कितने किसान कितने भूमि पर खेती करते है और ऐसे कितने किसान है. जो दूसरों के खेतों में अधिया पर खेती करते है। जिन आधार पर हम किसान के कृषि सामग्री, जैसे बीज, उर्बरक, और उपकरण की जरूरतों को कोर प्रणाली द्वारा मॉनिटरिंग कर सकेंगे जिससे समय पर कृषि सामग्री को उपलब्ध कराया जा सके। इस प्रणाली में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी/ कर्मचारी अपनी मनमानी नहीं कर पायेगा। शिक्षा क्षेत्र में समस्याएं : विश्वगुरु कहा जाने वाला भारत में आज शिक्षा का स्तर बहुत ही निम्न हो चूका है। हमसब जानते है, किसी भी देश के विकास की नीव शिक्षा पर निर्भर होती है। आज भी सरकार के शिक्षा सुधार के बड़े -बड़े दावे फेल है और भरष्टचार का शिकार है। सरकार की लचर व्यवस्थाओं ने बहुसंख्यक में शिक्षा माफियों और शिक्षा व्यवसायी-यों को जन्म दे डाला है, जहां आज शिक्षा माफिया नकल-ची बेरोजगार युवाओं को जन्म देते जा रहे है, जिनके पास न तो शिक्षा है और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक कौशल, जिस कारण देश का युवा खुद को गलत मार्गदर्शन में आगे बढ़ा रहा है। जैसा कि हम सब जानते है। आये दिन देखने और सुनाने को मिलता है कि फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले पकड़े गए। यह सब क्या है? आज इतनी आधुनिकता के बाद भी अपने शैक्षिक प्रमाण-पत्र बदलकर लोग शिक्षक, राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर बनकर, लोगों को धोखा दे रहे हैं। सरकारी तंत्र का अहम हिस्सा बनकर, भ्रष्ट बनाने में जुटे है। बस इतना ही कहना चाहूंगा की आज हमसब को मिलकर समाधान ढूढने की जरूरत है, इसके लिए हम आपके समक्ष समाधान के कुछ अंश बता रहा हूँ : समाधान : हमारा मकसद देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारना उसे अधिक से अधिक व्यवहारिक बनाना साथ ही पाठ्यक्रम, शिक्षण संस्थानों, शिक्षक छात्र की पूर्ण मॉनिटरिंग करना और नियंत्रण में रखना है। इसके निम्न प्रणाली इस प्रकार है : प्रथम: हम सर्वप्रथम National Intelligence Quotient (NIQ) का गठन करेंगे। जिसके तहत देश के हर बालक एवं माता पिता का मानसिक, सोशल, एस्ट्रो के स्तर पर एक जाँच किया जायेगा। इस प्रणाली से बालक की पूर्ण मानसिक स्थिति और रुचियों के आधार पर एक रिपोर्ट दिया जायेगा साथ ही बालक के माता पिता को एक गाइड लाइन दिया जायेगा। उसी समय हर बालक का स्थाई शिक्षा आईडी संख्या दी जाएगी, जिस शिक्षा आईडी द्वारा बालक अपनी समस्त शिक्षाएं पूरी करेगा। द्वितीय : हम एक शिक्षा, एक बोर्ड की प्रणाली को लाएंगे । जहां व्यवहारिक पाठ्यकर्म को प्रथमिकता दिया जायेगा । छात्र को पाठ्यक्रम को चयन करने की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। छात्रों की प्रतिभा को विश्वपटल पर लाने के लिए केन्द्रीय स्तर पर पैनल बनाये जायेंगे, जिससे छात्रों से सीधा संवाद होगा। तृतीय: इस प्रणाली में देश के समस्त शिक्षा संस्थाओं को इन पैनल किया जायेगा और इन शिक्षा संस्थानों द्वारा छात्र को दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर ग्रेडिंग तय की जाएगी और इसी ग्रेडिंग के अनुसार छात्र से ली जाने वाली पंजीयन, मासिक फीस, इवेंट शुल्क निर्धारित किये जायेंगे। जिससे शिक्षण संस्थानों द्वारा मनमाने शुल्क की वसूली बंद हो सके और संस्थान अपने गुणवत्ता मानक को बेहतर बना सके। चतुर्थ : जैसा कि हमने प्रथम प्रणाली में कहा है कि हर छात्र का एक शिक्षा आईडी होगा, जो कोर प्रणाली पर काम करेगा। जिससे हम प्रत्येक छात्र की मॉनिटरिंग और शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सकेंगे । इससे फर्जी प्रमाणपत्रों, शिक्षण संस्थानों आदि का अंत होगा और छात्र को सही मारदर्शन मिलेगा। पंचम : सम्पूर्ण भारत के शिक्षक को इन पैनल किया जायेगा। शिक्षकों के विशेषज्ञता का समय-समय पर मूल्यांकन और प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाया जायेगा। शिक्षकों को कम से कम 25 हजार रूपये मासिक मानदेय तय किया जायेगा, जिन्हें हर साल शिक्षण गुणवत्ता के मूल्यांकन के आधार पर 1 प्रतिशत का वेतन वृद्धि किया जायेगा, वेतन वृद्धि की यह प्रक्रिया १० वर्षों तक प्रभावी होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में समस्याएं : देश की बढ़ती जनसंख्या और बढ़ते संसाधनों के कारण हमारा वातवरण प्रदूषित होता जा रहा है, जिसके कारण तमाम प्रकार के वॉयरस प्रभावी होते जा रहे है और तमाम जानलेवा बीमारियों को जन्म देते जा रहे है। परन्तु वर्तमान बीजेपी सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बढ़ने के वजाय उनपर राजनीती करने में जुटी है, सत्ता के प्रभावी नेता अपने ही क्षेत्र में चिकित्सालय बनवायेगे, ऐसी राजनितिक सोच से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का परिचालन किया जाता है। क्या ऐसी सोच के साथ समूचे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुधार पाना सम्भव होगा? सरकार की इन्हीं लचर व्यवस्थाओं के कारण बहुसख्यक में स्वास्थ्य सेवा देने वाले फर्जी चिकित्सालय, डॉक्टर, और नकली दवाओं का व्यापार बढ़ रहा है। जो चिकित्सालय सरकार के कुछ मानकों को पूरा करती है, वे सुविधाओं को देने के नाम पर और दवाओं की अपनी मोनोपॉली चलकर मरीजों से कई सौ गुना धन उगाही कर रहे है, जिसपर सरकार कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है। समाधान : हम देश की बढ़ती जनसंख्या और बीमारी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को निर्धारित किया है। जिसके लिए हमने प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज, २(दो) मंडलों के बीच एक पीजीआई और ५ (पांच) मंडलों के बीच एक एम्स को बनाने का लक्ष्य रखा है। बढ़ती बेरोजगारी बड़ी समस्या : आज देश की बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका मुख्य कारण व्यवहारिक और रोजगार परक शिक्षा का न होना, मंहगा होना, युवाओं की योग्यता क्षमता के अनुसार मार्गदर्शन की कमी, सरकार की जटिल नीतियां, जिसके कारण युवाओं में भटकाव की स्थिति बनी हुई है और बढ़ती बेरोजगारी का मुख्य कारण बना हुआ है। समाधान : हमने एक ऐसी प्रणाली को विकसित किया है, जहां देश के युवाओं को प्रतिदिन ज्ञात होता रहेगा कि देश के तमाम निजी और सरकारी संस्थाओं में कितने पद रिक्त होने वाले है और भविष्य में कितने पद रिक्त होंगे और उनकी क्या योग्यता मांगे है? जिनके आधार पर युवा स्वयं की क्षमतानुसार शिक्षा का चयन कर सकेगा। इस प्रणाली में देश के में कितने बेरोजगार है और कितने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े है, यह देश की युवाओं को प्रतिदिन पता चलता रहेगा। हमारा यह मानना है कि जबतक आंकड़े स्पष्ट नहीं होंगे तबतक युवाओं के मार्गदर्शन का पारदर्शी प्रबंधन नहीं किया जा सकता। हम तमाम रोजगार के स्रोत को विकसित कर प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ेंगे, जिसकी एक प्रामाणिक रूपरेखा भी जारी करेंगे। युवाओं को मिलाने वाले निम्न लाभ इस प्रकार है : महंगाई समस्या : आज देश की सरकार महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर 2020 में अपने साढ़े छह साल के सबसे ऊंचे स्तर 7.6% तक पहुंच गई है, जो नवंबर 2021 में थोक महंगाई की दर (Wholesale Price Index – WPI) 12.54 फीसदी से बढ़कर 14.2 फीसदी होगी गई है, इस तरह देश में महंगाई बढ़ती ही जा रही है वहीं सरकार मुद्रास्फीति का रोना रोकर मूल वजहों से किनारा कस रही है। जबकि देश की मुद्रास्फीति प्रतिव्यक्ति द्वारा उपभोग किए जाने वाले वस्तुओं की अधिक और कम उपभोग पर तय होता है। जाहिर सी बात है, वस्तु और सेवाएं सस्ती होंगी तो उपभोग अधिक होगा और महंगी होंगी, तो उपभोग कम होगा। उपभोग कम होने पर हमारी मुद्रा का स्तर गिरेगा। अब प्रश्न उठता है? वस्तुओं के मूल्य को कम करने का मूल कारण क्या है? दूसरा प्रश्न खड़ा होता है कि वस्तु के उत्पादन का मूल स्रोत क्या है? उत्तर मिला, ऊर्जा के विभिन्न स्रोत जैसे विद्युत एवं पेट्रोलियम पदार्थ, जिनपर सरकार अपना नियंत्रण खोती जा रही है और जिसके निजीकरण में लगी है। जैसा कि आपको पता भी है कि जब अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरते है, तो यहाँ तेल के दामों में मामूली कमी करके अलग से टैक्स बढ़ा दिए जाते है। कुल मिलाकर सरकार इन स्रोतों के टैक्स माध्यमों से देश की जीडीपी को बढ़ने की जुगत में लगी है। आज जहां हम एक तरफ स्टर्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया की बात कर रहे है, वही दूसरी तरफ हमारे उत्पाद महंगी विद्युत और परिवहन के कारण महंगे बन रहे है, हमारे संसाधन छोटे और ओल्ड तकनीक पर चल रहे है, जिसके कारण उत्पाद और भी और महंगे बन रहे है, जो भारत के बाजार में ही प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे है और हमारे पड़ोसी देश चाइना से आए उत्पाद यहाँ की सरकार को भारी भरकम टैक्स देने के बावजूद सस्ते दामों में बेच रहे है और उन उत्पादों के सस्ता होने के कारण हम उन पर निर्भर होते जा रहे है। इसलिए मेरा यह मानना है कि जबतक सरकार इन ऊर्जा के मूल स्रोतों से जीडीपी बढ़ने का काम करेंगी, तबतक देश में महंगाई को नियंत्रित नहीं किया सकता। समाधान: हमारी सरकार ऊर्जा के मूल स्रोतों जैसे विद्युत और डीजल पेट्रोल के टैक्स में भरी कमी लाएगी। जिससे कृषि और वस्तुओं के उत्पादन लागत को घटाया जा सके और सड़क मार्ग राष्ट्रीय और एक्सप्रेसवे पर लिए जाने वाले माल वाहनों पर टैक्स को आधा करेगी। जिससे महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए हम विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स में भाई छूट देंग। कृषि उत्पादन क्षेत्र : हम किसानो को 2 रूपये पर यूनिट विद्युत प्रदान करंगे। हम डीजल में लिए जाने वाले टैक्स में ५० प्रतिशत तक कटौती करेंगे, जिससे कृषि उत्पादन लागत कम होगी। हमारा मानना है कि जब मूल वस्तु जैसे अनाज दलहन तिलहन की उत्पादन लागत कम होगी तो उससे बनाने वाली वस्तुओं की लागत भी कम होगी। इसलिए किसान को यह छूट दिया जाना, महंगाई को नियंत्रित करेगा। वस्तु उत्पादन क्षेत्र : किसी भी वस्तु के उत्पादन मूल्य विद्युत और मॉल भाड़ा मतलब डीजल या पेट्रोल की दामों पर निर्भर करता है, हमारा मकसद स्पष्ट है कि जबतक इनमे कमी नहीं की जाएगी तबतक महंगाई को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारी सरकार व्यवसायिक विद्युत को 3 रूपये प्रति यूनिट करेगी और डीजल के टैक्स में ५० प्रतिशत तक कमी लाएगी। हमारा मानना है कि जब महंगाई दर कम होगी तो प्रतिव्यक्ति विकास का दर बढ़ेगा, व्यक्ति जब आर्थिक रूप से मजबूत होगा, तो खरीदारी बढ़ेगी, तब मुद्रा का परिचालन और बढ़ेगा। इस प्रकार तमाम स्रोतों से टैक्स की संभावनाएं बढ़ेंगी, तभी देश की जीडीपी स्थाई रूप से बढ़ाया जा सकेगा। सड़क मार्ग राष्ट्रीय राज मार्ग और एक्सप्रेसवे पर लिए जाने वाले माल वाहनों पर टोल को ५० प्रतिशत तक की कमी लाएंगे और यह सुनिश्चित करंगे कि अनावश्यक टोल बंद हो। इसप्रकार हम तमाम ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं को बढ़ावा देंगे और उन्हें सस्ते एवं सरल तकनिकी से जनता तक पहुंचने का काम करेंगे। परिवहन समस्याएं : पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आज तमाम सेवाएं चलाई जा रही है, जैसे बस, रेल, हवाई जहाज, पानी के जहाज और प्राइवेट छोटे गाड़िया। जिनमे व्यापार की आपार संभावनाएं व्याप्त है, जिसे सही ढंग से प्रबंधन किया जाना जरुरी है। हमारा मानना है कि जिस तरह भोजन हर व्यक्ति की मूल जरुरत है, उसी प्रकार व्यक्ति का आना-जाना एक मूल जरुरत बन गया है और उनसे जुडी अन्य व्यवस्था जैसे ठहरने के लिए होटल, खाने के रेटोरेन्ट, संचार आदि। जो वर्तमान की जीडीपी में १८ प्रतिशत से अधिक तक का योगदान कर रहा है, अगर इन क्षेत्रों को आधुनिक रूप से विस्तारित किया जाये, तो इन क्षेत्रों में जीडीपी को ५० प्रतिशत तक पहुँचाया जा सकता है। लेकिन आज भी बस सेवा पब्लिक ट्रांसपोर्ट १०००० यात्री पर ६ बस है, जो विकास को गति देने के लिए बहुत ही कम है और करीब 90 प्रतिशत लोगों के पास बड़ी गाड़िया नहीं है। उसी प्रकार रेल से करीब हर वर्ष 8.5 अरब लोग यात्रा करते है, जो किसी एक छोटे देश के जनसंख्या के बराबर है, अब आप सोच सकते है कि कितनी आपार समभावनाये रोजगार की उपलब्ध है। लेकिन सरकार इसके निजीकरण से किराया लेकर देश की जीडीपी को बढ़ने में लगी है, जबकि इसका बहुत ही सरल ढंग से प्रबंधन किया जा सकता है। समाधान : हम परिवहन क्षेत्र से जुडी सभी संभावनाओं को आधुनकि और पारदर्शी रूप से प्रबंधन करने की पूरी योजना बना चुके है। बसों का प्रबंधन : हमारी सरकार का लक्ष्य होगा कि प्रतिवर्ष कम से कम हर एक प्रदेश की २५ डिपों को आधुनिकीकरण किया जायेगा। जिसके अंतर्गत आधुनिक बस स्टेण्ड और लग्जरी बस को शामिल किया जायेगा। और ओल्ड बसों को हटाया जायेगा। इन बस स्टेंडो पर सस्ते दर में ठहरने की व्यवस्था, भोजन और संचार व्यवस्था को स्थापित किया जायेगा। रेल का प्रबंधन : हमारा लक्ष्य बढ़ते यात्रियों को देखते हुए रेल व्यवस्थाओं का क्रियन्वयन करना है जैसे संभावित यात्री घनत्व के अनुसार स्टेशन निर्माण करना। हम भविष्य को देखते हुए 6 लेन रेलवे लाइन के निर्माण पर काम करेंगे। यात्रियों की हर सुविधा के लिए तमाम आधुनिक संसाधनों को विकसित करेंगे, जिनसे उनका समय और धन बचाया सके। प्रत्येक नागरिक को यात्रा लाभ दिया जायेगा, जिसके अंतर्गत यात्रा के दौरान व्यक्ति के साथ किसी प्रकार की अनहोनी होने पर सहायता एवं सहयोग प्रदान किया जायेगा। अभी बसों और ट्रेनों में ऑनलाइन टिकट प्रणाली संचालित है, लेकिन जटिल और बोरिंग है। जो हमारी प्रणाली में अत्यंत सरल और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा होगा, जिसे कोई भी नानटेक व्यक्ति आसानी से प्रयोग कर सकेगा। आत्मनिर्भर गाँव की परिकल्पना : हम गांव को समृद्ध और खुशाल बनाने का सकल्प ले चुके है। हम भारत को गौ से समृद्ध गांव बनाने की योजना बना चुके है। जहां गांव का हर एक व्यक्ति का 12 से 18 हजार तक की आय सुनिश्चित होगा। यानि गांव से शहर का पालयन बंद होगा। क्योंकि हमारा मानना है कि गांव समृद्ध, तो देश समृद्ध। जिन आधारों पर हम एक गांव की जीडीपी को बढाकर देश की जीडीपी को बढ़ाएंगे। जो इस प्रकार से होगा : परिवारिक बीमा एवं सुरक्षा लाभ: आर्थिक आधार पर बीमा सुरक्षा लाभ देश के प्रत्येक नागरिक को दिया जायेगा। जिसके अंतर्गत 2.50 लाख तक वार्षिक आय प्राप्त करने वाले सभी परिवारों को 15 लाख रूपए तक की नि:शुल्क चिकित्सा लाभ दिया जाएगा। गंभीर बीमारी एवं यात्रा आदि के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को 15 लाख तक आर्थिक लाभ दिया जाएगा। आरक्षण और सरक्षण : हमारी सरकार आरक्षण और सरक्षण दोनों के पक्षधर है, लेकिन निम्न क्षेत्रों में हम आरक्षण न देकर समयावधि को बढ़ाएंगे। जैसे : डॉक्टर, इंजीनियर और अध्यापन के क्षेत्रों में हम आरक्षण देने का विरोध करते है। इसके लिए हम इन क्षेत्रो में प्रतियोगी के उम्र की समयावधि को 35 वर्ष करेंगे। इसप्रकार जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार है, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, खाद्य पदार्थों में भरी छूट या निःशुल्क दिया जायेगा, जिससे वे माध्यम वर्ग की श्रेणी में आ सके। महिला सशक्तिकरण जन सहायता पेंशन लाभ कानून व्यवस्थाओं का आधुनिक प्रबंधन: ऑनलाइन एफ़आईआर प्रबंधन : वर्तमान में ऑनलाइन एफ़आईआर का प्रावधान है, जटिल प्रक्रिया होने के कारण इसका उपयोग सही ढंग से लोग नहीं कर पाते है, जिसे बहुत ही सरल बनाया जायेगा। जिससे कोई भी व्यक्ति घटना स्थल की वास्तविक स्थिति को बोलकर वीडियो रिकार्ड के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेगा। फ़र्ज़ी मुक़द्दमों का आधुनिक प्रबंधन : हमारे यहाँ ज्यादा तर मुकद्दमे भूमि विवाद को लेकर होते है और फौजदारी तक चले जाते है। ऐसे तमाम मामलों का हल हमारी भारतीय पहचान प्रणाली से स्वतः ख़त्म हो जायेंगे क्योंकि फर्जी दस्तावेजों से भरे मामले स्पष्ट होंगे। मुक़द्दमों की सुनवाई का आधुनिक प्रबंधन: मुक़द्दमों की तारीख ऑनलाइन प्रणाली पर होगा। जिससे वादी-प्रतिवादी को उनके मोबाइल पर सूचनाएँ प्रदान की जाएगी। स्थानीय स्तर के किसी वादी - प्रतिवादी को हाईकोर्ट या सुप्रिमकोर्ट जाने की कोई आवश्यकता नही होगी। आधुनिक प्रणाली में वादी-प्रतिवादी अपने अधिवक्ता को ऑनलाइन हॉयर कर सकता है। कोर्ट मुक़द्दमों को स्थानीय कोर्ट से ही सुनवाई हेतु ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से कर सकेगा। लाइव ईवीएम :- हमारा वर्तमान ईवीएम को समाप्त कर लाइव ईवीएम लाने का प्रस्ताव है, जिससे देश में मतदान एवं मत-गणना एक साथ हो सकें। इस प्रणाली से मतदाता निर्वाचन क्षेत्र से बहार भारत के किसी क्षेत्र में रहकर अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को मतदान कर सकेगा। इस प्रणाली में मतदाता सूचि में फेरबदल और फर्जी मतदान की संभावना समाप्त होगा। मतदाता सरल प्रक्रिया द्वारा स्वयं की पुष्टि आधार पर मतदान कर पायेगा। लाइव ईवीएम प्रणाली आने से देश का हर नागरिक जो देश की तमाम सेवा और सुरक्षा से जुड़े है, मतदान कर सकेंगे। इसप्रकार योग्य लोगो द्वारा मतदान की संभावना 99 प्रतिशत तक बढ़ेगी। इस प्रणाली द्वारा कम से कम खर्च में एक साथ मतदान कराए जा सकेंगे। जिसमें कर्मचारी अधिकारीयों की फेरबदल न के बराबर होगा। लाइव ईवीएम प्रणाली आने पर हम देश में “राईट टू रिकॉल” का अधिकार मतदाता को दे सकेंगे, जिससे लोकतंत्र के भ्रष्टाचार पर विराम लग सके और विकास की गति को बल मिलेगा। यातायात एवं वाहन लाइसेंस : समस्या : आज मार्ग दुर्घटनाएं एक आम बात हो गई है, जिसका सबसे बड़ा कारण भ्र्ष्ट वाहन लाइसेंस प्रणाली है, कहने को लाइसेंस ऑनलाइन हो गया है, लेकिन इसमें भरष्टचार और बढ़ गया है, जहां जमीनी स्तर पर कोई विशेष प्रशिक्षण प्रणाली नहीं है, बल्कि ऑनलाइन टेस्ट के भय के कारण व्यक्ति एजेंटों कर्मचरियों को रिश्वत देकर लाइसेन्स बनवाने की जुगत लगता है। जिसे न गाड़ी चलने का उचित प्रशिक्षण मिला है और न ही सड़क नियमावली का ज्ञान है और यह प्रक्रिया एक दिन में सम्भव भी नहीं हो सकता। जो भ्रष्टाचार और मार्ग दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है। सरकार दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तमाम प्रकार के भारी भरकम जुर्माना थोपकर यातायात जागरूकता शिविरों द्वारा नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी है, जो बहुत ही निम्न सोच को दर्शाता है जो दुर्घटना के मूल कारणों से बिलकुल विपरीत है। समाधान : हमने सिम्युलेटर प्रणाली द्वारा इस समस्या को हल करने का प्रयास किया है, इस प्रणाली को 15 से 16 वर्ष की आयु के पुरुष/महिला किसी भी सिम्युलेटर सेण्टर पर बाइक, कार, बस, ट्रक आदि वाहन चलना सीख सकता है। इसप्रकार व्यक्ति के 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत एक सरल पुष्टि आधार पर वाहन लाइसेंस संख्या प्राप्त कर सकेगा। जिसमे तीन तरह के रोडमैप के अनुसार प्रशिक्षण देने होंगे, जैसे: शहर, राज्य और केंद्रीय स्तर के क्षेत्रों में वाहन चलाने का अधिकार होगा। इस प्रणाली में जो व्यक्ति लाइसेंस प्राप्त करेगा, वही वाहन चला पायेगा, इसकी तकनीकी विकसित हो चुकी है। हमारे यहाँ एक वाहन को कई लोग चलाते है, जिसे हमने रिफ्रेंस प्रणाली में बंटा है, जिसके तहत वाहन मालिक रिफरल द्वारा वाहन चलाने का परमिशन दे सकेगा। इस प्रकार मार्ग दुर्घटना, अपराध और चोरी होने की दशा में व्यक्ति का स्पष्टीकरण त्वरित किया जा सकेगा। पर्यावरण का आधुनिक प्रबंधनः जल संरक्षण का आधुनिक प्रबंधन : हमने भूमिगत जल संरक्षण के लिए फ़िल्टर ट्यूब प्रणाली द्वारा जल को भूमिगत करने की रूपरेखा को तैयार किया है, जिससे भूमिगत जल की समस्या समाप्त होगी। जल जमाव को रोका जा सकेगा, नदियों में मिलने वाले नगर के गंदे जल को कम किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ के स्तर में कमी लाया जा सकेगा। वायु प्रदूषण प्रबंधन : हम प्रतिव्यक्ति एक पेड़ अभियान चला रहे है और हर पेड़ के आंकड़े स्पष्ट हो इसके लिए हम माय ट्री नाम से एक एप भी जारी किया है, जिसके तहत लगाए गए पेड़ों की स्थिति को देखा जा सकता है, जिसकी मॉनिटरिंग करके हम समय समय पर देखभाल भी कर सकते है। साथ ही हम इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देंगे और पुराने संसाधनों को नए तकनीकी से जोड़ा जायेगा, जो प्रदूषण मुक्त मानकों पर बना हो। गाय की महत्ता के आधार पर उद्योगों को विस्तारित करना : सर्वप्रथम गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना। व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गाय ऐसा प्राणी है, जिससे प्राप्त होने वाला कोई भी तत्व बेकार नही होता। इस प्रकार हम देखते है कि गाय के दूध, मुत्र, और गोबर तीनों अमृत तुल्य है, जिसमें व्यवसाय की अपार संभावनाएं व्याप्त है। हमारी सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ब्लाक, तह-सील एवं जिले स्तर पर गाय हेतु चारागाह के साथ उद्योग स्थापित करना, जिससे देश में फिर से दुग्ध क्रांति लाया जा सके। इस व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं रोज़गार की अपार संभावनाएं बनाई जा सकेंगी। युवा सशक्तिकरण हेतु आधुनिक प्रबंधन: व्यवस्थाओं का आधुनिक प्रबंधन: हमारी सरकार में मूल व्यवस्थाओं जैसे सड़क, पानी विद्युत, गैस कनेक्सन आदि छोटी-बड़ी समस्याओं के निस्तरण को ऑनकाल प्रावधान द्वारा करेगी। मुद्दो का समर्थन : ।। हमारा संकल्प ।। सेवा! सानिध्य! समपर्ण!! जय हिन्द! जय भारत! जय राष्ट्रवाद!! भारत महापरिवार पार्टी क्यों ? वर्तमान में 2500 से अधिक राजनैतिक दल है, जो केवल आम मुद्दों को गिनाकर, जातिगत, धर्मगत, क्षेत्रवाद और भाषावाद को लक्षित करके गठित की गई है। जिन विचारों और आम समस्याओं को लेकर पार्टियां गठित करते है, अगर उन लोगों से केवल यह पूछा जाये कि जनता की मूलभूत समस्याओं का समाधान क्या है? तो शायद उनके पास कोई जवाब नहीं है। जहाँ तक बात है, जातिगत शोषण और उनके उत्थान की, तो इन पार्टियों के नेतृत्वकर्ता जिन जातिगत और धर्मगत विचारों को लेकर पार्टी गठित करते है, चंद पैसों की लालच में आकर अपने विचार बदलते रहते है, और उनसे जुड़े लोगों की भावनाओं को बार-बार आहत करते रहते है, जिसे आज हम सभी को समझाना है। भारत महापरिवार पार्टी के गठन की विशेषता हमारी स्पष्ट अवधारणा है कि जिस प्रकार परिवार चलाने की जिम्मेदारी परिवार के सबसे सक्षम और जिम्मेदार व्यक्ति को दी जाती है, उसी तरह देश और समाज को चलाने की जिम्मेदारी भी, उसी को दी जानी चाहिए, जो बेहतर प्रबंधन की योग्यता रखता हो, तभी देश को सशक्त बनाया जा सकता है। पार्टी का विजन पूर्णतः स्पष्ट है, जिसके लिए हमने तीन स्लोग्न जारी किया है। हमारा मकसद एजेंडा बताकर वादा आधारित राजनीती का अंत करना, जिसके लिए हमारा पहला स्लोगन है- एजेंडा नहीं, समाधान। क्योंकि हम केवल समाधानों पर काम कर रहे है और यह इरादा रखते है कि समयबद्ध संकल्प के साथ काम कैसे होगा। जिसके लिए हमारा दूसरा स्लोगन है- वादा नहीं, इरादा। हमारी पार्टी योग्य और अपराध मुक्त युवाओं को लाने के लिए संकल्पित है और बिना किसी भेद भाव के खुला मंच प्रदान कर रही है और भविष्य में पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और विवाद न आये इसके लिए हमने पार्टी संबिधान के अनुसार पूरा सॉफ्टवेर ही बना दिया है जहां कार्यकर्ताओं द्वारा किये गए सामाजिक कार्यों और उपलब्धियों को मॉनिटर भी करेगा। इस प्रणाली में जो व्यक्ति योग्य होगा, वह पार्टी के उचस्थ पदों पर रहेगा और नेतृत्व कर्ता होगा। जिसके लिए हमारा तीसरा स्लोगन है- नो पॉलिटकल पॉलुशन, ओनली सलूशन। जहाँ जातिगत धर्मगत, भाषागत, क्षेत्रवाद जैसे दोष नहीं है, केवल समाधान ही एक मात्र विकल्प है। किसी भी पार्टी को खड़ा करने के लिए सबसे बड़ा विषय होता है एक पवित्र लक्ष्य कार्य करने का उद्देश्य, समाज और देश के प्रति पवित्र दृष्टिकोण और बड़ा पवित्र संकल्प। नियति ने यह सभी विषयों को हमें एक साथ प्रदान किया है, जिसपर हम निरन्तर बढ़ रहे है। इन्हीं आधारों पर हमने राजनितिक सुधार एवं सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य को लेकर भारत की सबसे बड़ी पार्टी बनाने के लिए काम कर रहे है। प्रबंधन का मूल: हमारा स्पष्ट मानना है कि देश का हर व्यक्ति, स्वयं के विकास के लिए, दिन-रात परिश्रम करके, जो धन अर्जित करता है, उस अर्जित धन से वह स्वयं के विकास के लिए जो कुछ वह अपने संसाधनो को बढ़ने के लिए खरीदता है, उस मूल्य पर वह टैक्स देता है। जो कुछ भी वह संचय करता है, उसपर वह इनकम टैक्स देता है और तो और जितनी बार सरकार की उन तमाम सेवाओं से जुड़ता है, उतनी बार वह टैक्स देता है, जिन टैक्स के पैसों से देश के विकास की नीव रखी जाती है। हमने अपने रिसर्च में पाया कि सरकार देश के संचालन की तीन भूमिका का प्रबंधन करती है - सेवा, सुरक्षा और व्यवस्था जिनके संचालन के लिए जो इंफ्राटक्चर खड़ा किया जाता है, सरकार उसका केवल प्रबंधन करती है। हमने उन तमाम सेवाओं, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के प्रबंधन की एक आधुनिक पारदर्शी प्रणाली को विकसित किया है, जिसके लागू होने पर जनता को सरकारी जाल से मुक्ति मिलेगी, भ्रष्टाचार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। जनता का समय और पैसा दोनों बचेगा। हर दिन आर्थिक आधार पर जनगणना स्वतः होती रहेगी। हमारा स्पष्ट मानना है, जब तक आकड़े स्पष्ट नहीं होंगे, तबतक प्रतिव्यक्ति विकास को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। जबकि अभी यह जनगणना 10 वर्ष में एक बार कराया जाता है, जो बिलकुल गलत है, हमने जो प्रणाली बनाई है, उससे अनावश्यक खर्च को रोका जा सकेगा। वर्तमान में देश का सबसे बड़ा मुद्दा है, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जिससे निपटने के लिए आज भी सरकार के पास कोई ठोस समाधान नीति नहीं है। तमाम समस्याओं की जड़ है भ्रष्टाचार, जो हर व्यक्ति के विकास का अवरोधक है, जहां व्यक्ति का समय और धन दोनों खर्च होता है। जो केवल सरकारी तंत्र की जटिलता के कारण हो रहा है, हमने इसी तंत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाने का काम किया है, जिसका एक-एक समाधान प्रणाली हम बना चुके है। जिसे हम अपनी वेबसाइट www.bharatmahaparivar.org पर जारी कर रखा है। जिसे आप पढ़ सकते है और इस पवित्र उद्देश्य की साथ जुड़ सकते है। हम सभी सम्मानित लोगों से यह कहना चाहते है कि यदि आप वास्तव में देश की व्यवस्था को बदलना चाहते हैं और देश के सर्वोत्तम हितों पर विचार करते है, तो भारत महापरिवार पार्टी आपके लिए एक खुला मंच है। यह भारत की पहली पार्टी है, जो केवल समाधानों को बनाकर गठित किया गया है। इसलिए हम अपने घोषणा-पत्र में समस्याओं के समाधान को जारी करते है, जबकि देश के तमाम राजनैतिक दल केवल समस्या बताते है, समस्याओं के समाधान कैसे होगा है? यह कोई नहीं बताता है। हमने जनता के समक्ष केवल समस्याओं के समाधान को प्रमाणिकता के आधार पर प्रस्तुत किया है, हम देश के बेहतर भविष्य ले लिए संकल्पित है। जिन समाधानों को आप पढ़े, समझे और फिर हमारे साथ जुड़ें। हमारा संकल्प अयोध्या को पुनः भारत एवं अवध प्रदेश की संयुक्त राजधानी बनाना? जैसा कि आप जानते है कि भारत को विश्व गुरु बनाने और रामराज लाने को लेकर राजनीति की जा रही है । जब हमने इन दोनो कथनों पर अध्ययन किया तो पाया कि इन कथनों का अस्तित्व अयोध्या भूमि से जुड़ा हुआ है। अयोध्या भारत ही नहीं, अपितु विश्व की सबसे उत्तम संस्कार और संस्कृतियों की जन्मभूमि है, जो गुरूओं और महात्मओं की भूमि है, जहाँ का कण कण दिव्य और देवतुल्य है, जहाँ भाइयों के अटूट प्रेम सेवा, त्याग की गाथा आज भी लोगों को मर्यादा और संस्कार के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती है, जो एक आयुद्ध भूमि है । आज जहाँ सत्ता पाने के लिए एक भाई दूसरे भाई का गला काट रहा है । वही अयोध्या भूमि से जुड़ी संस्कृति में, एक भाई दूसरे भाई के लिए एक से बढ़कर एक त्याग कर रहा है, जहां सत्ता की कण मात्र की लालसा नहीं है। जहां एक पत्नी प्रजा के एक अपवाद को दूर करने के लिए, स्वयं का परित्याग करा देती है। जो आज भी जीवन मूल्यों, आदर्शों, के साथ साथ प्रेम,सेवा त्याग का उत्तम उदाहरण देती आ रही है और पूरी मानवता को उत्तम जीवन जीने के लिए प्रेरित भी कर रहा है, इसलिए मेरा यह भी मानना है कि आज हम केवल यहीं से अपने आने वाली पीढ़ी को जीवन जीने का उत्तम उदाहरण दे सकते है। इसलिए मेरा यह मानना है कि अगर भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो यह गुरुओं की भूमि से ही संभव हो सकता है और इसीप्रकार राम की भूमि से ही रामराज्य की परिकल्पना की जा सकती है। क्योंकि दिल्ली महाभारत काल से ही छल,कपट की भूमि बन कर रह गई । मुगलों से लेकर अंग्रेजों ने ऐसी ही विचाधारा से प्रभावित होकर भाई -भाई को आपस मे लड़ाकर राज किया। वर्तमान में ऐसे ही धरोहरों से भरा पड़ा है और ऐसी ही विचारों से देश को चलाया जा रहा है। मैं आप सभी से पूछता हूँ, क्या आप ऐसी भूमि और विचारों के साथ भारत की संस्कर और संस्कृति को बचा पायेंगे । क्या इसी भूमि से विश्वगुरु की कल्पना ही कि जा सकती है? क्या यहाँ से रामराज लाया जा सकता है? जहाँ जाने के बाद शुद्ध मन वाले व्यक्ति के विचार ही बदलाव आ जाता है, इस पर विचार जरूर करें । हमारे हिसाब से ऐसे भूमि पर राजधानी होना भी नही चाहिए, इसलिए यह संकल्प लिया है। जहां तक इन तथ्यों की प्रामाणिकता का सवाल है, अगर आप अध्ययन करेंगे तो पाएंगे कि अयोध्या पूरी पृथ्वी की पहली राजधानी थी। युगों तक पूरा भारतवर्ष की राजधानी था। मुगल काल के दौरान अवध प्रांत की राजधानी भी थी। जिसके सभी प्रमाण पुराणों और इतिहास में मिलेंगे। विरोध का उत्तर : जहां तक विरोध का सवाल है, मेरा स्पष्ट मानना है। छल-कपट की भूमि से, न ही रामराज लाया जा सकता है, न ही विश्वगुरु बनाया जा सकता है और न ही भारत की संस्कार और संस्कृति को बचाया जा सकता है। इसलिए हमने यह निर्णय दृष्टि से नही, दृष्टिकोण से लिया है। दृष्टिकोण यह कहता है कि श्रीराम और उनके भाइयों जैसा प्रेम, सेवा और त्याग, जैसा उदाहरण पूरी दुनिया के, किसी अन्य भूमि पर नहीं मिलता है, इसलिए हमने यह संकल्प लिया है । जहाँ तक बात है, दूसरे धर्मों के मनाने और न मानने वाले लोगों की, तो जबतक दृष्टि से देखा जाएगा, तो आप देख भी रहे है कि चंद पैसों की लालच में आपका भाई भी, आपका विरोधी बन जाता है, लोग अपने माता-पिता की सेवा करने के वजाय, उन्हें घर से बाहर निकाल देते है, बेटी जैसी बहु को जिंदा जला दे रहे है, जाति/धर्म के झगड़ें तो दूर का विषय है। दृष्टिकोण यह कहता है कि 3500 वर्ष पूर्व तक पूरी दुनिया में कोई दूसरा धर्म नही था, यदि कोई अन्य धर्म नही था, तो यह सिद्ध हो जाता है कि हम सब एक ही सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग हैं, आज भले ही हम सब अलग-अलग धर्मों और जातियों में बंटे हुए हैं, लेकिन हम सब एक हैं। मेरा मतलब सिर्फ इतना है कि चाहे हिन्दू हो मुसलमान, सिख हो या ईसाई जिस भी धर्म को मनाने वाला है, वह अपने बच्चे को जीवन जीने का उत्तम उदाहरण ही देता है और मानव मर्यादा के साथ जीवन जीने का सबसे उत्तम उदहारण, अयोध्या भूमि के अलावा पूरी दुनिया के किसी अन्य भूमि से नही मिलता, इसलिए हमने यह संकल्प लिया है। राजधानी की रूप रेखा : यह राजधानी अष्टचक्र के रूप में विकसित किया जाएगा । जो हमारी मान्यता 84, 14 और 5 कोशी परिक्रमा मार्ग को द्रष्टिगत रखते हुए बनाया जाएगा । जिसमे कुल आठ मार्ग होंगे। जिसमे से चार मार्ग 84 से 14 कोसी परिक्रमा मार्ग तक जुड़ेंगे और चार मार्ग 84 से १४ कोसी होते हुए 5 कोसी परिक्रमा मार्ग तक जुड़ेंगे। यह राजधानी का मुख्य मार्ग होगा। पूर्व के मुख्य मार्ग पर हमारा भारत द्वार बनाया जायेगा, जहाँ से देश का तिरंगा फहराया जाएगा। हम पूर्व दिशा में में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय, तमाम रिसर्च संस्थान बनायेगे। पश्चिम दिशा में रिहायसी कालोनी, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम स्थापित करेंगे। उत्तर दिशा में संसद भवन सचिवालय अन्य प्रशासनिक कार्यालय होंगे। दक्षिण दिशा में कंपनियों और व्यावसायिक हब के रूप से विकसित किया जाएगा । अवध और ब्रज प्रदेश क्यों ? वर्तमान में उत्तर प्रदेश को कोई ४ भागों में तो कोई 2-3 भागों बांटने की मांग उठ रही है। हमने उत्तर प्रदेश को दो संस्कृतिओं के आधार पर बांटने का निर्णय लिया है, पहला अवध प्रान्त जो सेवा, त्याग की संस्कृति का उदाहरण देता है, जिसकी राजधानी अयोध्या होगी। दूसरा ब्रज प्रान्त जो प्रेम की सांस्कृति का परिचय देता आ रहा है, जिसकी राजधानी मथुरा होगी। इस प्रकार अयोध्या भारत और अवध प्रान्त की सयुक्त राजधानी होगी। अवध प्रान्त में हमने लखीमपुर हरदोई से लेकर ललितपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र तक के जिलों को शामिल किया है इसमें कुल 46 ज़िला आएगा। यह इसका नक्शा है : दूसरा व्रज प्रान्त, जहाँ की प्रेममई संस्कृति आज भी पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है जो एक प्रेममई संस्कृति की विरासत है। जिसका विस्तार भारत को जोड़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए हमने ब्रज की राजधानी मथुरा को बनाने का संकल्प लिया है। जिसमे कुल २९ जिले आयेंगे। इसमें सहारनपुर, मुजफरनगर से लेकर इटावा तक के जिले शामिल होंगे, यह इसका नक्शा है : अवध का इतिहास अनादिकाल से है। यहाँ के सर्वप्रसिद्ध राजा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम थे जिनके पूर्वजों ने ही अवध की स्थापना की थी। अवध शब्द अयोध्या से ही निकला है। अवध की राजधानी प्रारम्भ में "अयोध्या" थी मुग़ल काल में ईरानी शासक सआदत अली खान ने फिर से 1722 में अवध प्रांत बनाया और उसकी राजधानी अयोध्या बनाई। इस प्रकार सन 1775 में नवाब आसफ़ुद्दौला ने अवध की राजधानी अयोध्या को हटाकर लखनऊ ले गए तब से लेकर अब तक लखनऊ है। सन 1865 से लेकर 1902 तक संयुक्त प्रान्त दो अलग-अलग प्रांतों के रूप में था, उत्तर-पश्चिमी प्रांत तथा अवध प्रांत। उस समय सामान्यतः इसे संयुक्त प्रांत (अंग्रेजी में यू॰पी॰) के नाम से भी जानते थे। यह संयुक्त प्रांत लगभग एक शताब्दी 1865 से 1947 तक अस्तित्व में बना रहा। इस प्रांत में ब्रिटिश काल के दौरान रामपुर व टिहरी गढ़वाल जैसी स्वतंत्र रियासतें भी शामिल थीं। 25 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान की घोषणा से एक दिन पूर्व सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इन सभी रियासतों को मिलाकर इसे उत्तर प्रदेश नाम दिया था। यह इस बात से भी प्रमाणित होता है कि अवध प्रदेश कभी बहुत बड़ा प्रान्त हुआ करता था, जो बिहार यानी मगध और नेपाल के सीमा तक फैला था। यह राजधानी पर्यावरण की दृष्टिगत रखते हुए बनाया जायेगा जहाँ कि 33 प्रतिशत भूमि को दीर्घायु और फलदार बृक्षों से युक्त किया जाएगा । जो एक घर, एक पेड़ की अवधारणा पर विकसित होगा। नगर को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यहाँ के घरों, कारखानों आदि से निकला गंदा पानी नदियों में नही डाला जाएगा, जो फ़िल्टर टूयूब तकनीकी पर काम करेगा। जिसकी पूरी रूपरेखा हम बना चुके है। भारत की राजधानी को लेकर विरोध में उठ रहे प्रश्नो के उत्तर : प्रश्न यह है कि भारत का तिरंगा कहाँ फहराया जायेगा? आप अध्ययन करंगे तो पाएंगे कि अभी जो लालकिला पर झण्डा फहराया जाता, वह बिल्कुल गलत है, क्योंकि आज यह मुगलिया संस्कृति की पहचान है, जिस किले पर तमाम राजाओं ने विजय प्राप्त कर राज किया, इसलिए यह एक विजय का प्रतीक हो सकता है, लेकिन स्वतंत्रता के लिए देश के लाखों गरीब, किसान और युवाओं ने अपनी कुर्बानियां दिए है, किसी एक राजा ने देश को आज़ाद नहीं कराया है, इसलिए यह उन लाखों शहीदों का प्रतीक नही हो सकता। दूसरा इंडिया गेट जो अंग्रेजों के साम्राज्य को बचाने वाले ब्रिटिश इंडियन आर्मी के 90 हजार सैनिक एंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध मे मारे गए थे, उनकी याद 1931 में बनाया गया। यह वही सैनिक थे, जो हमारे क्रांतिकारियों को मार रहे थे और गरीब जनता का उत्पीड़न कर रहे थे, वह भले ही हममे से एक थे, अगर देखा जाए, तो यह भी हमारे शहीदों का प्रतीक नही हो सकता और जहाँ तक बात है, राष्ट्रपति और संसद भवन, तो वह भी अंग्रेजों ने बनवाया । मैं देश की जनता से पूछना चाहता हूँ कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आजतक हमारे लाखों शहीदों लिए कौन सा प्रतीक बनाया गया। इसलिए हम अयोध्या में लाखों शहीदों की याद में भारतद्वार बनवाएंगे, जहाँ से भारत का तिरंगा फहराया जाएगा। हम स्पष्ट करना चाहते है कि यह राजधानी केवल राजनीति का केंद्र होगा, इसलिए संसद भवन यहाँ बनेगा। राष्ट्रपति भवन और सुप्रीमकोर्ट दिल्ली में ही रहेगा। भारत की वास्तविक परिकल्पना से जुड़े मुद्दे पर हमारा दृषिकोण विश्वगुरु की परिकल्पना : हमारा भारतीय दर्शन हमारे आसपास व्याप्त सत्व, तत्व, जल-थल-नभ, ग्रह-नक्षत्र, आराधना, प्रार्थना, अध्यात्म, समाधी आदि का दर्शन हमारे ऋषि मुनियों ने दिया। जो वेदों, पुराणों और उपनिषदों के माध्यम से मानव को आत्मा तक के दर्शन दिए है और उन्हें मोक्ष दिलाने तक के अध्यात्म दर्शन को बताया। इन समस्त प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि भारतीय दर्शन सबसे प्राचीन है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का दर्शन है, जो सिर्फ भारत भूमि के ऋषिमुनियों ने कराया, जिन दर्शनो के आधार पर आज दुनिया भर के तमाम वैज्ञानिक अपने आविष्कारों को मूर्तरूप दे रहे है। हमारे तमाम महापुरुषों ने समय-समय पर मानव मूल्यों और आदर्शों के साथ-साथ प्रेम, सेवा, त्याग का ऐसा उदहारण दिया है, जिससे एक उत्कृष्ट समाज की स्थापना हो सके। हमने दुनिया को उत्तम आचार-विचार, व्यवहार और संस्कारों का ज्ञान दिया, इसलिए हम दुनिया में महान कहे जाते है और विश्व गुरु की श्रेणी में रखे जाते है। परन्तु आज दुनिया को संस्कारों का ज्ञान देने वाला भारत क्यों संस्कार विहीन होता जा है ? हममें क्यों वैमनष्यता की भावना घर करती जा रही है, जिस पर हमसब को चिंतन करने की जरुरत है। आज हमें चिंतन और मंथन के साथ धर्मशास्त्रों के गुण रहस्यों के वैज्ञानिकता को समझने और समझाने की जरुरत है, शिक्षा से विद्या तक आने की जरुरत है, तभी हम पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित हो पाएंगे। रामराज्य की परिकल्पना : आज वर्तमान राजनीति में यह शब्द खूब प्रयोग किया जा रहा है, क्या आपको पता है? कि रामराज किसे कहते थे? अगर नहीं तो आपको बताना चाहूंगा कि श्रीराम जी पहले ऐसे शासक थे, जिन्होंने सर्वप्रथम प्रजातंत्र की स्थापना किया था, जहां प्रजा की हर इक्छा राजा की इच्छा हुआ करता था। जहाँ प्रजा के बीच किसी प्रकार का कोई अपवाद न रहे, इसपर काम करते थे, जो रामराज का वास्तविक परिभाषा है । परन्तु आज वास्तव में प्रजातंत्र है और रामराज का दम्भ भरने वाली सरकार है, लेकिन आज आप देख रहे है, किसान 1 साल से सड़कों पर मर रहा था देश की खड़ी की गई स्थाई संपत्ति को गिरवी रखकर किराये पर देकर देश को चलाने की जुगत लगाई जा रही है, जनता कुत्तों बिल्लियों की तरह मारी जा रही है, आय से ज्यादा टैक्स और जुर्माना वसूलकर जीडीपी बढ़ाई जा रही है, केवल सत्ता पाने के लिए औरतों का चीरहरण हो रहा है। अगर इसे आप रामराज्य कहेंगे है? तो आपसब श्रीरामजी का और रामराज्य शब्द दोनों का अपमान कर रहे है। सोने की चिड़िया बनाने की परिकल्पना: आज़ादी के 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी हम विकासशील देश बने हुए है, जबकि चाइना भारत से २ दो वर्ष बाद आज़ाद हुआ और विकसित हो गया। आज दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन गया है और दुनिया का सबसे प्राचीनतम ज्ञान रखने वाला भारत। आज चंद नेताओं द्वारा फैलाये गए जातिवाद, धर्मवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद की राजनीति में फंसा हुआ है। हम आजतक प्रतिव्यक्ति विकास का लक्ष्य नहीं तय कर पाए। हम जनसख्या आंकड़ों के हिसाब से देश के संसाधनों को सुनिश्चित नहीं कर पाए, आज भी इनपर राजनीति करके वोट माँगा जाता है। पिछली सरकार ने कोई योजना लाई तो दूसरी सरकार आने पर उसे रोकेगी। आज भी हमें किसी प्रकार का व्यवसायिक लाइसेंस या परमिशन लेना हो तो कई साल लग जाते है। नियुक्तियों का निर्धारण आज भी भ्रष्टाचार का शिकार है। भारत के युवाओं के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें छोटी-छोटी चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। आज भी हम एक खरीदार बनकर रह गए है, जबकि चाइना एक सफल क्रिएटर की भूमिका में आ चूका है। आज भी तकनीकी के मामले में हम बहुत पीछे है और दूसरों की तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे है। हद तो तब हो गई जब वर्तमान सरकार स्थाई संपत्ति को गिरवी रखकर और किराये पर देकर देश की जीडीपी को बढ़ाने की जुगत लगा रही है। आप चिंतन कीजिए घर को किराए पर चढ़ाकर क्या आप आर्थिक संपन्न बन पाएंगे ? हम निजीकरण की तुलना अमेरिका से कर रहे है, आप सोचिये अमेरिका की प्रतिव्यक्ति वर्तमान आय 65000 डॉलर प्रतिवर्ष है और भारत की औसतन आय एक दिन के सौं रुपए भी नहीं है। आज हमे आरक्षण और संरक्षण दोनों की जरुरत है। लेकिन आज ही हम अपनी संपत्ति को गिरवी रख देंगे, तो सरकार कैसे आर्थिक रूप से कमजोर जनता के लिए मददगार साबित हो पायेगी? क्या आपको नहीं लगता है कि इस निजीकरण नीति से सरकार पूंजीपतियों की गुलाम बनकर रह जाएगी? क्योंकि निरंकुश शासन किसी भी देश के लोकतंत्र के लिए घातक है, जिस नीति को हम 200 साल भोग भी चुके है। पहले अंग्रेजों के थे, अब अपना कहने वालों के, लेकिन मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। जिसपर हमें आज चिंतन करना होगा ? राष्ट्रवाद और अखंड भारत का मूल: हमारा मानना है कि उत्तम मानव मर्यादा और संस्कारों द्वारा जो विचारधारा सर्वमान्य होती है, जो तमाम विविधताओं को सम्मान और एकी भाव से देखती है, जो हर प्राणियों के कल्याण की कामना करती है, यही संस्कार जड़ित संस्कृति बन जाती है जो हर प्राणी को एक दूसरे से जोड़ती है और पूजती है, जिससे एक उत्तम संस्कृति का गठन होता है, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं कि भारत की संस्कृति और उनसे जन्मी राष्ट्रवादी विचारधारा दुनिया के तमाम देशो से श्रेष्ठ है। परन्तु आज हम भ्र्म रुपी राजनीति का शिकार होते जा रहे है और हम सत्य से दूर होते जा रहे है, जबकि हमारे धर्मशस्त्र का यह श्लोक हमारी विचारधारा की पहचान करता है : ( यं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद्, अध्याय ४, श्लोक ७१), अर्थ - यह अपना है और यह दूसरे का है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं, उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है। परन्तु वर्तमान राजनीति व्यापक विचारधारा को बदलकर संकीर्ण विचारधारा के आधार पर काम कर रही है, इसलिए हमारी मानसिकता छोटी-छोटी होती जा रही है, जो छोटे भूभाग को राष्ट्रवाद से जोड़कर राष्ट्र को खंडित करने का काम कर रही है, जबकि सत्य यह है कि राष्ट्र हमारे संस्कृति का परिचय है और संस्कृति किसी भूभाग के बंट जाने पर समाप्त नहीं होता है, बल्कि यह बंटे हुए, भूभाग को एक करने का काम करती है। आज हमे उन लोगों का ऋणी होना चाहिए, जो भारत की संस्कृति से जुड़े संस्कार को दुनिया के विभिन्न देशों में रहकर संजोए हुए है। जो पुनः भारत को अखंड भारत बनाने की एक कड़ी है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि हमारी संस्कृति हमें एक पूर्ण और मर्यादित पुरुष बनाने का ज्ञान देती है, जिसके लिए पूरी धरती पर रहने के स्थान खुले है, क्योंकि अच्छे लोगों के लिए पूरी दुनिया में रहने के स्थान है, लेकिन बुरे व्यक्ति के लिए स्वयं के घर में भी स्थान नहीं मिलता। जहाँ तक बात है, एक छोटे भूभाग को राष्ट्र से जोड़ना , तो आपसब जाने-अनजाने राष्ट्रवादी विचारधारा को खंडित करने का काम कर रहे है। आज हमें यह तय करना होगा कि हम राष्ट्र के लिए जी रहे है, या भारत के बांटे हुए छोटे से भूभाग के लिए। जिसका तात्पर्य देश की एक भगौलिक सीमा तक होता है, जो कमजोर होने पर गुलाम भी होता है और उसकी सीमाएं घटती भी है। इसलिए मेरा मानना है कि आज जो लोग दुनिया के कट्टर विचारों वाले देशों में जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि में संघर्षों के साथ जीवन यापन कर रहे है। उनके प्रति हमें ऋणी होना चाहिए क्योंकि वही हमारी संस्कृति को संजोए हुए, राष्ट्रवादी विचारों को जीवित बनाये हुए है। उनपर किसी तरह की राजनीति नहीं होना चाहिए जैसा कि आज देखने को मिल रहा है। हमारा मकसद उन्हें वापस बुलाना भी नहीं होना चाहिए, बल्कि वह वहां के तमाम क्षेत्रों में अपनी भूमिका कैसे तय कर सके? वे लोग वहां कैसे सुरक्षित रह सके? इस पर हमारा प्रयास और नीति होनी चाहिए। तभी हम अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को फैला पाएंगे और अखंड भारत बना पाएंगे। ऐसा नहीं कि यह हम अपनी राजनीति को चमकने के लिए ऐसा कर रहे है। आज के 3500 वर्ष पूर्व जब गुरु चाणक्यजी ने अखंड भारत की परिकल्पना किया था, तब भी यहाँ की जनता भर्मित थी। लेकिन उन्होंने इस संकल्प को पूरा किया। हलाकि उस समय भूभाग को जीतकर उसे अपने अधीन मिलाने की परंपरा थी, लेकिन उस समय भी हमारा मकसद भारत की संस्कृति का फैलवा ही था , इसलिए गुरु चाणक्य जी ने चन्द्रगुप्त मौर्य की शादी सेल्यूकस की बेटी हेलन से कराया था, जिससे हमारी संस्कृति से जुड़ाव बना रहे। हिंदुत्व का परिचय: आज जिन हिन्दुओं को अपनी महान संस्कृति पर गर्व होना चाहिए है, वही हिन्दू एक संकीर्ण राजनीति के शिकार होते जा रहे है, जिनमे अहंकार बढ़ता जा रहा है, जिस कारण हिन्दू स्वयं के पतन का कारण बनते जा रहे है। हिंसा की निंदा करने वाला हिन्दू, आज हिंसक होता जा रहा है। आज हममें से कितने ऐसे लोग है, जो हिन्दू शब्द का वास्तविक परिभाषा भी नहीं जानते है। वे गलत अवधारणा के शिकार हो रहे है और आज हिन्दुवाद राजनीतिक दलों का अंग बनकर रहा गया। इस मामले में वर्तमान सरकार जैसे सर्टिफिकेट बाँट रही है, जैसा कि आज अभी देख रहे है, जो वर्तमान सरकार में नहीं है, वह राष्ट्रवादी और हिंदूवादी नहीं है। हम सक्षिप्त में हिन्दू और हिन्दुस्थान के सम्बन्ध में बताना चाहता हूँ : हमारे इतिहासकरों ने हिन्दू एवं हिन्दुस्तान नाम के विषय में बहुत से मत दिये है जिनमें बहुत सी भ्रांतियां है। लेकिन इन मतों से पहले हमारे प्राचीन ऋषियों ने हिन्दु एवं हिन्दुस्थान के विषय में तमाम साक्ष्य को प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित किया है। जैसे:- बृहस्पति आगम के अनुसार विशालाक्ष शिव द्वारा रचित राजनीति के महान शास्त्र का संक्षित महर्षि वृहस्पतिजी ने बार्हस्पत्य शास्त्र से किया। फिर वराहमिहिर ने एक शास्त्र लिखा जिसका नाम वृहत्संहिता है। इसके बाद वृहस्पति-आगम की रचना हुई। बृहस्पति आगम सहित अन्य आगम इरानी या अरबी सभ्यताओं से बहुत प्राचीनकाल में लिखा जा चुके थे। अतः उसमें हिन्दुस्थान का उल्लेख होने से स्पष्ट है कि हिन्दू या हिन्दूस्थान नाम प्राचीन ऋषियों द्वारा दिया गया था न कि अरबों/ईरानियों द्वारा। 1- ऋग्वेद के बृहस्पति आगम में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार आया है : "हिमलयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं । तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते।। (अर्थात् हिमालय से इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश को हिंदुस्तान कहते हैं ) 2- सिर्फ वेद ही नहीं......बल्कि..मेरुतंत्र ( शैवग्रन्थ ) में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया है :- "हीनं च दूष्यतेव् हिन्दुरित्युच्च ते प्रिये। ( अर्थात्... जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं ) 3- और इससे मिलता जुलता लगभग यही यही श्लोक कल्पद्रुम में भी दोहराया गया है :- हीनं दुष्यति इति हिन्दू ।" ( अर्थात् जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते है। ) 4- पारिजात हरण में हिन्दू को कुछ इस प्रकार कहा गया है:- हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टं । हेतिभिः श्त्रुवर्गं च स हिन्दुर्भिधियते ।। (अर्थात् जो अपने तप से शत्रुओं का दुष्टों का और पाप का नाश कर देता है वही हिन्दू है ) 5- माधव दिग्विजय में भी हिन्दू शब्द को कुछ इस प्रकार उल्लेखित किया गया है :- ओंकारमन्त्रमूलाढ्य पुनर्जन्म द्रढ़ाश्य:। गौभक्तो भारतगरुर्हिन्दुर्हिंसन दूषकः ।। ( अर्थात्.... वो जो ओमकार को ईश्वरीय धुन माने कर्मों पर विश्वास करे, गौपालक रहे तथा बुराइयों को दूर रखे वो हिन्दू है ) हिमालय से हिन्दूः एक अन्य विचार के अनुसार हिमालय के प्रथम अक्षर ‘हि’ एवं ‘इन्दु’ का अंतिम अक्षर ‘न्दु’। इन दोनों अक्षरों को मिलाकर शब्द बना ‘हिन्दू’ और यह भू-भाग हिन्दूस्थान कहलाया। ‘हिन्दू’ शब्द उस समय धर्म की बजाय राष्ट्रीयता के रूप में जब प्राकृत एवं उपभ्रंष शब्दों का प्रयोग साहित्यिक भाषा के रूप में हाने लगा, उस समय सर्वत्र प्रचलित ‘हिन्दू’ शब्द का प्रयोग संस्कृत गंथों में होने लगा। ब्राहिस्पत्य, कालिका पुराण, कवि कोष, राम कोष, मेदिनी कोष, शब्द कल्पद्रुम, मेरूतंत्र, पारिजात हरण नाटक, भविष्य पुराण, अग्नि पुराण और वायु पुराणदि संस्कृत गंर्थो में ‘हिन्दू’ शब्द जाति अर्थ में सुस्पष्ट मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन संस्कृत ग्रंथों के रचना काल से पहले भी ‘हिन्दू’ शब्द का जन समुदाय में प्रयोग होता था। वर्तमान सरकार ने राजनीति का इतना स्तर गिरा दिया है कि आज एक हिन्दू, दूसरे हिन्दू को, इसलिए देशद्रोही बना देता है कि वह उनकी नीतियों का विरोध करता है। आज बीजेपी जो राष्ट्रवाद का ज्ञान देती है वही देशद्रोह शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाना चाहिए, यह तक भूल गई है। सत्ता के मद में इतने अंधे हो गए है, जो व्यक्ति मोदी सरकार के नीतियों का समर्थन नहीं करता है, उसे वह देशद्रोही या आंतकवादी बनाने में संकोच भी नहीं करते और जब वही व्यक्ति, उनकी पार्टी से जुड़ जाता है, तो वह राष्ट्रवादी हो जाता है। आज वर्तमान सरकार, प्रधानमंत्री पद की एक गरिमा और भाषा की मर्यादा तक भूल गए है, वह यह भी नहीं सोचते कि प्रधानमंत्री के हर एक शब्द को दुनिया के इतिहासकार टंकित भी करते है। क्या आपसब को नहीं लगता कि जिन लोगों को देशद्रोही बनाया जा रहा है, वह इस देश के नागरिक है। उनका विरोध केवल आपकी नीतियों से है। यह कहाँ तक न्यायसांगत है? क्या यह निम्नकोटि की विचारधारा नहीं है? और क्या आप इस निम्नकोटि की विचारधारा से विश्वगुरु, रामराज्य की परिकल्पना कर सकते है? हम उन तमाम लोगों के भरम को दूर करने का प्रयास कर रहे है, आज जिन्हे आदर्श मानकर झूठे राष्ट्रवाद और हिन्दुत्ववाद का भरम फैलाया जा रहा है। आज सभी को उन महान पुरुषों के विचारों पर चिंतन करना चाहिए? जो वास्तव में भारत की संस्कार और संस्कृति को बचाना चाहते है और वास्तविक राष्ट्रवाद को जानना चाहते है। आपके समक्ष कुछ उदहारण रखता हूँ, शायद आपकी आँखों पर पड़े भरम का पर्दा हटे: आपको बताना चाहूंगा कि आज यह जो सारी लड़ाई चल रही है, वह पंथ को धर्म बनाकर कट्टरता के साथ मानाने और मनवाने को ले करके है। अभी मैंने जितने महापुरुषों का नाम लिया है, यह सभी दूसरे पंथों को मानाने वाले लोगों को, अपनाने वाले लोग थे। जिसका सीधा अर्थ था कि व्यक्ति चाहें किसी भी पंथ या धर्म को मानते हो अगर वह व्यक्ति भारत की संस्कृति से जन्मी राष्ट्रवादी विचारधारा से सहमत है, तो उन्हें वह स्वीकार करते थे। लेकिन आज यह लड़ाई पंथ निरपेक्ष से धर्म निरपेक्ष हो चूका है और धर्मनिरपेक्ष से धर्म विशेष यानी कट्टरता का रूप लेता जा रहा है, जो राष्ट्र के लिए घातक है। आप से कहना चाहूंगा कि आप वर्तमान सरकार की नीतियों पर चिंतन करें। जहाँ स्वयं को हिंदूवादी कहने वाली सरकार ही, हिन्दू को खतरे गिना रही है क्यों हमे एक दूसरे से डरा रही है? हम यह तक भूल गए कि यह श्री राम और श्री कृष्ण की धरती है और पूरी दुनिया मे वीर पुरषों का प्रमाण कहीं मिलता है, तो वह सिर्फ भारत भूमि ही है। जहाँ पर शिवाजी, महाराणा प्रताप, लक्ष्मीबाई जैसे तमाम वीरों ने जन्म लिया। हम हौसलों से जंग जितने वाले लोग है और सवा लाख से एक लड़ाने वाले लोग है। कब से इतने कमज़ोर हो गए है? क्या आपको नही लगता कि ऐसा कहकर हम अपने वीर पुरुषों का अपमान कर रहे है, यह तो हिन्दुवों को कायर बनाए की राजनीति की जा रही है । अगर ऐसा है, तो हमे बीजेपी सरकार की नियत और नीतियों पर पुनः विचार करना होगा। जातिगत और धर्मगत राजनीति से जुड़े प्रश्न ? भारत २०० साल की गुलामी के बाद आज़ाद हुआ, जहाँ हमे खुलकर जीने और अपनी संस्कृतियों को फैलाने की आज़ादी मिली। आज़ादी की घोषणा के बाद भारत को 565 रियासतों को एक करने की चुनौती को हमारे महान नेताओं सरदार बल्ल्भभाई पटेल जी, नेहरूजी और उनके सहयोगी सचिव बीपी मेनन ने दिनरात एक करके किया, जो जीवंत भारत का एक रूप बना। उसी भारत में सबसे पहले भाषावाद के आधार पर बाँटने वाले लोग खड़े हुए, आज क्षेत्रवाद का जहर घोला जा रहा है। जातिवाद अपने चरम पर आ चूका है, आज जातिवादी पार्टियों और संगठनो की एक बाढ़ आ चुकी है। कुछ लोग जातिगत समस्याओं को गिनाकर जातिगत, धर्मगत, क्षेत्रगत संगठन और पार्टिया खड़ी कर रहे है। परन्तु आप यह भी देख रहे है कि वही दल सत्ता में आने के लिए दूसरे दल के साथ गठजोड़ करते नजर आते है, तो क्या जातिगत, धर्मगत और क्षेत्रगत विचारों को मानाने वाले लोगों का हनन नहीं होता? इसलिए हम सभी देशवाशियों से यह अपील करते है कि आपसब राष्ट्रवाद, हिन्दुत्ववाद, भाषावाद, जातिवाद, धर्मवाद और क्षेत्रवाद जैसे बहकावे में न आये, क्योंकि इन बातों से देश का विकास सम्भव नहीं हो सकता। आजतक इन दलों ने समस्याएं गिनाई है, उनके समाधान का एक भी प्रस्ताव नहीं रखा है। अगर इन दलों ने आजतक हर एक समस्या के समाधान पर काम किया होता। तो आज देश का हर व्यक्ति आर्थिक रूप से विकसित हो चूका होता, लेकिन आज देश की दशा और दिशा आपके सामने है। आपको बताना चाहता हूँ कि भारत महापरिवार पार्टी आपके हर एक मूल समस्याओं का समाधान बना चुकी है। जनता को हर एक सरकार से कुछ पाने की उम्मीद, केवल उम्मीद बनकर रह जाती है, उनसे से जुड़े कुछ प्रश्न जो केवल मन में ही रह जाते है, उसे कोई दल सत्ता में आने के बाद पूरा नहीं करती, बल्कि जो योजनाए लेकर आते है, उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत लोग उठा लेते है, और कमजोर, लाचार वंचित रह जाते है। सरकार की इन्हीं खामियों की वजह से है आज भी देश की जनता छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जद्दोजहद कर रही है।क्या आपको नहीं लगता है कि जातिवाद , धर्मवाद, भाषावाद और क्षेत्रवाद पर राजनीति करने वाली पार्टियाँ आपसी मतभेद और वैमनष्यता फैला रही है ? और अप्रत्यक्ष रूप से देश को तोड़ने का काम कर रहे है। समाधान विकल्प : भारत महापरिवार पार्टी अपने लक्ष्य राजनीतिक सुधार एवं संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के साथ राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत करने जा रही है। जहां हमारा मकसद "वादा" और "एजेंडा" आधारित राजनीति का अंत करना है और देश के प्रतिव्यक्ति विकास का लक्ष्य तय करना है। जो केवल और केवल समाधान की आधुनिक और पारदर्शी नीतियों से संभव है, जहाँ हर व्यक्ति का समय और धन को बचाया जा सकेगा, जिससे देश का विकास सुनिश्चित हो सके। जिसे भारत महापरिवार पार्टी समाधान के रूप में बना चुकी है, जिन आधारों पर हमने भारत महापरिवार पार्टी को देश की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसे आपके साथ और समर्थन की जरुरत है। आप हमारे तमाम समाधान नीतियों को हमारी वेबसाईट www.bharatmahaparivar.org पर जाकर पढ़ सकते है। समस्या? - समाधान? पहचान पत्र की समस्या? आज़ादी के 76 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक हम यह साबित करने में जुटे है कि हम इस देश के नागरिक है, क्योंकि जब भी हम सरकार के सेवा, सुरक्षा और व्यवस्था तंत्र से जुड़ते है, तो हमें स्वयं की पुष्टि बार-बार करानी पड़ती है, जिसके लिए हमें तमाम प्रकार के पहचान पत्र, प्रमणपत्र, दस्तावेज बनवाने पड़ते है, जहाँ व्यक्ति का समय और धन दोनों बर्बाद होता है, जिसके जंजाल से बचने के लिए, हम दलाल से जुड़ते है, कर्मचारी अधिकारी को रिस्वत देते है, यही से भ्रष्टाचार की शुरुआत होती है। समाधान? भारत महापरिवार पार्टी, भारतीय पहचान संख्या के रूप में एक ऐसे पहचान प्रणाली को विकसित किया है, जो भारत के नागरिक का सशक्त पहचान संख्या होगा। इस सशक्त प्रणाली के आने पर देश की जनता को जन्म, मृत्यु, जाति, निवास, आय, मतदाता कार्ड, राशनकार्ड, पैन कार्ड, आधारकार्ड किसी प्रकार का लाइसेंस आदि बनवाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। किसी प्रकार के आवेदनों, खाते और लाइसेंस आदि के लिए संख्या पुष्टि के आधार पर होगा। यह केवल संख्या के रूप में होगा, इसके लिए किसी प्रकार का कार्ड या पहचान-पत्र जारी नहीं किया जायेगा। इस प्रणाली के लागू होने पर निम्न लाभ जनता को मिलेंगे : नागरिक सुरक्षा लाभ : देश के प्रत्येक नागरिक को पहचान संख्या के साथ कुछ लाभ सक्रिय किया जाएगा। जैसे : चिकित्सा लाभ, शिक्षा लाभ, जन्म और मृत्यु पर बीमा लाभ, बेटियों को जन्म से लेकर मृत्यु तक आर्थिक सहयता एवं सुरक्षा लाभ। जवान , किसान और मजदूरों को आर्थिक आधार पर लाभ और सहायता, बेरोजगार को सहायता और आर्थिक लाभ। पेंशन एवं यात्रा लाभ, आपदा लाभ, आवास लाभ आदि दिए जायेंगे। चिकित्सा लाभ के तहत 1.5 लाख तक सालाना आय करने वाले परिवार के 2 बच्चों सहित 25 लाख तक का चिकित्सा लाभ दिया जायेगा। साथ ही परिवार के मुखिया माता या पिता की किसी भी दर्घटना द्वारा मृत्यु होने पर 25 लाख तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। शिक्षा लाभ: के तहत 1.5 लाख तक सालाना आय करने वाले परिवार के २ बच्चों को उच्च कक्षाओं तक निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान होगा। नागरिकों के परिवार के २ बच्चों को ३ साल तक २००० रुपया आर्थिक (भरण-पोषण) लाभ दिया जायेगा। साथ ही बच्चे के जन्म के एक साल बाद चिकित्सा लाभ सक्रिय कर दिया जायेगा। यह लाभ केवल1.5 लाख तक सालाना आय करने वाले परिवार को ही दिया जायेगा। पेंशन एवं यात्रा लाभ : देश के आर्थिक रूप से व्यक्ति के आकड़े स्पष्ट होने से उन व्यक्तियों को ६० वर्ष उपरांत 5000 रुपया पेंशन लाभ दिया जायेगा। साथ ही उन्हें देश भर में भ्रमण करने के लिए निःशुल्क यात्रा लाभ दिया जायेगा। कर्मचारियों को लाभ : इस प्रणाली के लागू होने से सभी रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलने वाले पेंशन एवं आर्थिक लाभ के लिए दफ़्तर के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सेवानिवृत्त होने के साथ ही आर्थिक मदद उनके खाते त्वरित में भेजा जायेगा। जो टैक्स से बिलकुल मुक्त होगा। इस प्रणाली के लागू होने से चल-अचल भूमि आदि के आकड़े स्पष्ट होंगे। जिससे उन्हें बेचने और खरीदने की आसान प्रणाली होगी। फर्जी आधार पर खरीदना – बेचना समाप्त होगा। आपदा लाभ : किसी प्रकार की आपदा जैसे भूकंप, आंधी-तूफान, बाढ़, महामारी आदि आने पर हम व्यक्ति को त्वरित पुष्टि कर सकेंगे और सही व्यक्ति को त्वरित लाभ प्रदान किया जा सकेगा। आवास लाभ: देश के पास व्यक्ति के आर्थिक आधार के अनुसार आकड़े होने से हम बिना आवास वाले परिवार को आवास के लिए आर्थिक मदद त्वरित दे सकेंगे। बेटिओं को लाभ : हम बेटियों को पूर्ण सुरक्षा लाभ प्रदान करने वाले हैं। जिसके तहत प्रमुख तीन लाभ दिए जायेंगे। पहला: बेटी के जन्म के 21 साल बाद 21 लाख प्रदान किए जाएंगे। दूसरा: जीवन भर मुफ्त शिक्षा। तीसरा: आजीवन मुफ्त स्वास्थ्य लाभ। (यह लाभ, 1.5 लाख रुपये तक सालाना कमाने वाले परिवार को दिया जाएगा)। जो जन्म के बाद स्वतः ही सक्रिय हो जायेगा। जवान , किसान और मजदूरों को आर्थिक आधार पर लाभ और सहायता प्रदान किया जायेगा। हमारी प्रणाली में शहीद हुए जवान, किसानों के फसलों का नुकसान और मजदूरों के कार्य के दौरान मृत्यु होने पर ४८ घंटे के भीतर आर्थिक सहयता उनके परिवार के खाते में भेजा जायेगा। कृषि क्षेत्र में समस्या: आजतक भारत सरकार कृषि और किसानों के स्पष्ट आकड़े नहीं जुटा पाई। जिस कारण से आज कृषि क्षेत्र में तमाम समस्याएं बनी हुई है। जैसे उर्बरक और बीज समय से उपलब्ध न होने की समस्या। फसल नष्ट होने पर समय से मुवाबजा न मिलने की समस्या। फसल अधिक हो जाये तो भण्डारण की समस्या। उचित और निर्धारित मूल्य न मिलाने की समस्या। जैसी तमाम छोटी बड़ी समस्याए आज भी बनी हुई है। समाधान : हम पहचान संख्या से यह स्पष्ट कर लेंगे कि देश में कितने किसान कितने भूमि पर खेती करते है और ऐसे कितने किसान है. जो दूसरों के खेतों में अधिया पर खेती करते है। जिन आधार पर हम किसान के कृषि सामग्री, जैसे बीज, उर्बरक, और उपकरण की जरूरतों को कोर प्रणाली द्वारा मॉनिटरिंग कर सकेंगे जिससे समय पर कृषि सामग्री को उपलब्ध कराया जा सके। इस प्रणाली में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी/ कर्मचारी अपनी मनमानी नहीं कर पायेगा। शिक्षा क्षेत्र में समस्याएं : विश्वगुरु कहा जाने वाला भारत में आज शिक्षा का स्तर बहुत ही निम्न हो चूका है। हमसब जानते है, किसी भी देश के विकास की नीव शिक्षा पर निर्भर होती है। आज भी सरकार के शिक्षा सुधार के बड़े -बड़े दावे फेल है और भरष्टचार का शिकार है। सरकार की लचर व्यवस्थाओं ने बहुसंख्यक में शिक्षा माफियों और शिक्षा व्यवसायी-यों को जन्म दे डाला है, जहां आज शिक्षा माफिया नकल-ची बेरोजगार युवाओं को जन्म देते जा रहे है, जिनके पास न तो शिक्षा है और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक कौशल, जिस कारण देश का युवा खुद को गलत मार्गदर्शन में आगे बढ़ा रहा है। जैसा कि हम सब जानते है। आये दिन देखने और सुनाने को मिलता है कि फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले पकड़े गए। यह सब क्या है? आज इतनी आधुनिकता के बाद भी अपने शैक्षिक प्रमाण-पत्र बदलकर लोग शिक्षक, राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर बनकर, लोगों को धोखा दे रहे हैं। सरकारी तंत्र का अहम हिस्सा बनकर, भ्रष्ट बनाने में जुटे है। बस इतना ही कहना चाहूंगा की आज हमसब को मिलकर समाधान ढूढने की जरूरत है, इसके लिए हम आपके समक्ष समाधान के कुछ अंश बता रहा हूँ : समाधान : हमारा मकसद देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारना उसे अधिक से अधिक व्यवहारिक बनाना साथ ही पाठ्यक्रम, शिक्षण संस्थानों, शिक्षक छात्र की पूर्ण मॉनिटरिंग करना और नियंत्रण में रखना है। इसके निम्न प्रणाली इस प्रकार है : प्रथम: हम सर्वप्रथम National Intelligence Quotient (NIQ) का गठन करेंगे। जिसके तहत देश के हर बालक एवं माता पिता का मानसिक, सोशल, एस्ट्रो के स्तर पर एक जाँच किया जायेगा। इस प्रणाली से बालक की पूर्ण मानसिक स्थिति और रुचियों के आधार पर एक रिपोर्ट दिया जायेगा साथ ही बालक के माता पिता को एक गाइड लाइन दिया जायेगा। उसी समय हर बालक का स्थाई शिक्षा आईडी संख्या दी जाएगी, जिस शिक्षा आईडी द्वारा बालक अपनी समस्त शिक्षाएं पूरी करेगा। द्वितीय : हम एक शिक्षा, एक बोर्ड की प्रणाली को लाएंगे । जहां व्यवहारिक पाठ्यकर्म को प्राथमिकता दिया जायेगा । छात्र को पाठ्यक्रम को चयन करने की पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। छात्रों की प्रतिभा को विश्वपटल पर लाने के लिए केन्द्रीय स्तर पर पैनल बनाये जायेंगे, जिससे छात्रों से सीधा संवाद होगा। तृतीय: इस प्रणाली में देश के समस्त शिक्षा संस्थाओं को इन पैनल किया जायेगा और इन शिक्षा संस्थानों द्वारा छात्र को दी जाने वाली सुविधाओं के आधार पर ग्रेडिंग तय की जाएगी और इसी ग्रेडिंग के अनुसार छात्र से ली जाने वाली पंजीयन, मासिक फीस, इवेंट शुल्क निर्धारित किये जायेंगे। जिससे शिक्षण संस्थानों द्वारा मनमाने शुल्क की वसूली बंद हो सके और संस्थान अपने गुणवत्ता मानक को बेहतर बना सके। चतुर्थ : जैसा कि हमने प्रथम प्रणाली में कहा है कि हर छात्र का एक शिक्षा आईडी होगा, जो कोर प्रणाली पर काम करेगा। जिससे हम प्रत्येक छात्र की मॉनिटरिंग और शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सकेंगे । इससे फर्जी प्रमाणपत्रों, शिक्षण संस्थानों आदि का अंत होगा और छात्र को सही मारदर्शन मिलेगा। पंचम : सम्पूर्ण भारत के शिक्षक को इन पैनल किया जायेगा। शिक्षकों के विशेषज्ञता का समय-समय पर मूल्यांकन और प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाया जायेगा। शिक्षकों को कम से कम 25 हजार रूपये मासिक मानदेय तय किया जायेगा, जिन्हें हर साल शिक्षण गुणवत्ता के मूल्यांकन के आधार पर 1 प्रतिशत का वेतन वृद्धि किया जायेगा, वेतन वृद्धि की यह प्रक्रिया 5 वर्षों तक प्रभावी होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में समस्याएं : देश की बढ़ती आबादी और बढ़ते संसाधनों के कारण हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है जिससे तमाम तरह के वायरस प्रभावी होते जा रहे हैं और तमाम जानलेवा बीमारियों को जन्म दे रहे हैं। लेकिन वर्तमान सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बढ़ाने की बजाय उन पर राजनीति करने में लगी है, सत्ता के प्रभावी नेता अपने-अपने क्षेत्र में निजी अस्पताल बनाकर सरकारी अस्पतालों की जर्जर व्यवस्था तक पहुंचेंगे. ऐसी राजनीतिक सोच से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। क्या ऐसी सोच से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार संभव होगा? सरकार की इन्हीं लचर व्यवस्थाओं के कारण बहुसख्यक में स्वास्थ्य सेवा देने वाले फर्जी चिकित्सालय, डॉक्टर, और नकली दवाओं का व्यापार बढ़ रहा है। जो चिकित्सालय सरकार के कुछ मानकों को पूरा करती है, वे सुविधाओं को देने के नाम पर और दवाओं की अपनी मोनोपॉली चलाकर मरीजों से कई सौ गुना धन उगाही कर रहे है, जिसपर सरकार कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है। समाधान : हम देश की बढ़ती जनसंख्या और बीमारी को देखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को निर्धारित किया है। जिसके लिए हमने प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज, २(दो) मंडलों के बीच एक पीजीआई और ५ (पांच) मंडलों के बीच एक एम्स को बनाने का लक्ष्य रखा है। हमने स्वास्थ्य समस्याओं का एक स्थाई समाधान निकाला है, जिसके लिए हमने चिकित्सालय, मरीज और डॉक्टर की कोर प्रणाली को विकसित किया है। जहां हम दवाओं और सर्जिकल उत्पादों के गुणवत्ता मानकों के आधार पर मूल्यों का निर्धारण करेंगे। जिसपर सरकार का पूर्ण नियंत्रण होगा। निम्न समाधान इस प्रकार है : बढ़ती बेरोजगारी बड़ी समस्या : आज देश की बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका मुख्य कारण व्यवहारिक और रोजगार परक शिक्षा का न होना, मंहगा होना, युवाओं की योग्यता क्षमता के अनुसार मार्गदर्शन की कमी, सरकार की जटिल नीतियां, जिसके कारण युवाओं में भटकाव की स्थिति बनी हुई है और बढ़ती बेरोजगारी का मुख्य कारण बना हुआ है। समाधान : हमने एक ऐसी प्रणाली को विकसित किया है, जहां देश के युवाओं को प्रतिदिन ज्ञात होता रहेगा कि देश के तमाम निजी और सरकारी संस्थाओं में कितने पद रिक्त होने वाले है और भविष्य में कितने पद रिक्त होंगे और उनकी क्या योग्यता मांगे है? जिनके आधार पर युवा स्वयं की क्षमतानुसार शिक्षा का चयन कर सकेगा। इस प्रणाली में देश में कितने बेरोजगार है और कितने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़े है। यह देश की युवाओं को प्रतिदिन पता चलता रहेगा। क्योंकि हमारा यह मानना है कि जबतक आंकड़े स्पष्ट नहीं होंगे तबतक युवाओं के मार्गदर्शन का पारदर्शी प्रबंधन नहीं किया जा सकता। हम तमाम रोजगार के स्रोत को विकसित कर प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ेंगे, जिसकी एक प्रामाणिक रूपरेखा भी जारी करेंगे। इसप्रकार युवाओं को मिलाने वाले निम्न लाभ : महंगाई समस्या : आज देश की सरकार महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं कर पा रही है। भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर 2020 में अपने साढ़े छह साल के सबसे ऊंचे स्तर 7.6% तक पहुंच गई है, जो नवंबर 2021 में थोक महंगाई की दर (Wholesale Price Index – WPI) 12.54 फीसदी से बढ़कर 14.2 फीसदी होगी गई है, इस तरह देश में महंगाई बढ़ती ही जा रही है वहीं सरकार मुद्रास्फीति का रोना रोकर मूल वजहों से किनारा कस रही है। जबकि देश की मुद्रास्फीति प्रतिव्यक्ति द्वारा उपभोग किए जाने वाले वस्तुओं की अधिक और कम उपभोग पर तय होता है। जाहिर सी बात है, वस्तु और सेवाएं सस्ती होंगी तो उपभोग अधिक होगा और महंगी होंगी, तो उपभोग कम होगा। उपभोग कम होने पर हमारी मुद्रा का स्तर गिरेगा। अब प्रश्न उठता है? वस्तुओं के मूल्य को कम करने का मूल कारण क्या है? दूसरा प्रश्न खड़ा होता है कि वस्तु के उत्पादन का मूल स्रोत क्या है? उत्तर मिला, ऊर्जा के विभिन्न स्रोत जैसे विद्युत एवं पेट्रोलियम पदार्थ, जिनपर सरकार अपना नियंत्रण खोती जा रही है और जिसके निजीकरण में लगी है। जैसा कि आपको पता भी है कि जब अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरते है, तो यहाँ तेल के दामों में मामूली कमी करके अलग से टैक्स बढ़ा दिए जाते है। कुल मिलाकर सरकार इन स्रोतों के टैक्स माध्यमों से देश की जीडीपी को बढ़ाने की जुगत में लगी है। आज जहां हम एक तरफ स्टर्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया की बात कर रहे है, वही दूसरी तरफ हमारे उत्पाद महंगी विद्युत और परिवहन के कारण महंगे बन रहे है, हमारे संसाधन छोटे और ओल्ड तकनीक पर चल रहे है, जिसके कारण उत्पाद और भी और महंगे बन रहे है, जो भारत के बाजार में ही प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे है और हमारे पड़ोसी देश चाइना से आए उत्पाद यहाँ की सरकार को भारी भरकम टैक्स देने के बावजूद सस्ते दामों में बेच रहे है और उन उत्पादों के सस्ता होने के कारण हम उन पर निर्भर होते जा रहे है। इसलिए मेरा यह मानना है कि जबतक सरकार इन ऊर्जा के मूल स्रोतों से जीडीपी बढ़ाने का काम करेंगी, तबतक देश में महंगाई को नियंत्रित नहीं किया सकता। समाधान: हमारी सरकार ऊर्जा के मूल स्रोतों जैसे विद्युत और डीजल पेट्रोल के टैक्स में भरी कमी लाएगी। जिससे कृषि और वस्तुओं के उत्पादन लागत को घटाया जा सके और सड़क मार्ग राष्ट्रीय और एक्सप्रेसवे पर लिए जाने वाले माल वाहनों पर टैक्स को आधा करेगी। जिससे महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए हम विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स में भाई छूट देंगे। कृषि उत्पादन क्षेत्र : हम किसानो को 2 रूपये पर यूनिट विद्युत प्रदान करेंगे। हम डीजल में लिए जाने वाले टैक्स में 50 प्रतिशत तक कटौती करेंगे, जिससे कृषि उत्पादन लागत कम होगी। हमारा मानना है कि जब मूल वस्तु जैसे अनाज दलहन तिलहन की उत्पादन लागत कम होगी तो उससे बनाने वाली वस्तुओं की लागत भी कम होगी। इसलिए किसान को यह छूट दिया जाना, महंगाई को नियंत्रित करेगा। वस्तु उत्पादन क्षेत्र : किसी भी वस्तु के उत्पादन मूल्य विद्युत और मॉल भाड़ा मतलब डीजल या पेट्रोल की दामों पर निर्भर करता है, हमारा मकसद स्पष्ट है कि जबतक इनमे कमी नहीं की जाएगी तबतक महंगाई को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारी सरकार व्यवसायिक विद्युत को 3 रूपये प्रति यूनिट करेगी और डीजल के टैक्स में 50 प्रतिशत तक कमी लाएगी। हमारा मानना है कि जब महंगाई दर कम होगी तो प्रतिव्यक्ति विकास का दर बढ़ेगा, व्यक्ति जब आर्थिक रूप से मजबूत होगा, तो खरीदारी बढ़ेगी, तब मुद्रा का परिचालन और बढ़ेगा। इस प्रकार तमाम स्रोतों से टैक्स की संभावनाएं बढ़ेंगी, तभी देश की जीडीपी स्थाई रूप से बढ़ाया जा सकेगा। सड़क मार्ग राष्ट्रीय राज मार्ग और एक्सप्रेसवे पर लिए जाने वाले माल वाहनों पर टोल को 50 प्रतिशत तक की कमी लाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि अनावश्यक टोल बंद हो। इसप्रकार हम तमाम ऊर्जा स्रोतों की संभावनाओं को बढ़ावा देंगे और उन्हें सस्ते एवं सरल तकनिकी से जनता तक पहुंचने का काम करेंगे। परिवहन समस्याएं : पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आज तमाम सेवाएं चलाई जा रही है, जैसे बस, रेल, हवाई जहाज, पानी के जहाज और प्राइवेट छोटे गाड़िया। जिनमे व्यापार की आपार संभावनाएं व्याप्त है, जिसे सही ढंग से प्रबंधन किया जाना जरुरी है। हमारा मानना है कि जिस तरह भोजन हर व्यक्ति की मूल जरुरत है, उसी प्रकार व्यक्ति का आना-जाना एक मूल जरुरत बन गया है और उनसे जुडी अन्य व्यवस्था जैसे ठहरने के लिए होटल, खाने के रेटोरेन्ट, संचार आदि। जो वर्तमान की जीडीपी में 18 प्रतिशत से अधिक तक का योगदान कर रहा है, अगर इन क्षेत्रों को आधुनिक रूप से विस्तारित किया जाये, तो इन क्षेत्रों में जीडीपी को 50 प्रतिशत तक पहुँचाया जा सकता है। लेकिन आज भी बस सेवा पब्लिक ट्रांसपोर्ट 10000 यात्री पर 6 बस है, जो विकास को गति देने के लिए बहुत ही कम है और करीब 90 प्रतिशत लोगों के पास बड़ी गाड़िया नहीं है। उसी प्रकार रेल से करीब हर वर्ष 8.5 अरब लोग यात्रा करते है, जो किसी एक छोटे देश के जनसंख्या के बराबर है, अब आप सोच सकते है कि कितनी आपार संभावनाये रोजगार की उपलब्ध है। लेकिन सरकार इसके निजीकरण से किराया लेकर देश की जीडीपी को बढ़ाने में लगी है, जबकि इसका बहुत ही सरल ढंग से प्रबंधन किया जा सकता है। समाधान : हम परिवहन क्षेत्र से जुडी सभी संभावनाओं को आधुनकि और पारदर्शी रूप से प्रबंधन करने की पूरी योजना बना चुके है। बसों का प्रबंधन : हमारी सरकार का लक्ष्य होगा कि प्रतिवर्ष कम से कम हर एक प्रदेश की 25 डिपों को आधुनिकीकरण किया जायेगा। जिसके अंतर्गत आधुनिक बस डिपो और लग्जरी बस को शामिल किया जायेगा। और ओल्ड बसों को हटाया जायेगा। इन बस डिपो पर सस्ते दर में ठहरने की व्यवस्था, भोजन और संचार व्यवस्था को स्थापित किया जायेगा। रेल का प्रबंधन : हमारा लक्ष्य बढ़ते यात्रियों को देखते हुए रेल व्यवस्थाओं का क्रियन्वयन करना है जैसे संभावित यात्री घनत्व के अनुसार स्टेशन निर्माण करना। हम भविष्य को देखते हुए 6 लेन रेलवे लाइन के निर्माण पर काम करेंगे। यात्रियों की हर सुविधा के लिए तमाम आधुनिक संसाधनों को विकसित करेंगे, जिनसे उनका समय और धन बचाया सके। प्रत्येक नागरिक को यात्रा लाभ दिया जायेगा, जिसके अंतर्गत यात्रा के दौरान व्यक्ति के साथ किसी प्रकार की अनहोनी होने पर सहायता एवं सहयोग प्रदान किया जायेगा। अभी बसों और ट्रेनों में ऑनलाइन टिकट प्रणाली संचालित है, लेकिन जटिल और बोरिंग है। जो हमारी प्रणाली में अत्यंत सरल और पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा होगा, जिसे कोई भी नानटेक व्यक्ति आसानी से प्रयोग कर सकेगा। आत्मनिर्भर गाँव की परिकल्पना : हम गांव को समृद्ध और खुश हाल बनाने का सकल्प ले चुके है। हम भारत को गौ से समृद्ध गांव बनाने की योजना बना चुके है। जहां गांव का हर एक व्यक्ति का 12 से 18 हजार तक की आय सुनिश्चित होगा। यानी गांव से शहर का पलायन बंद होगा। क्योंकि हमारा मानना है कि गांव समृद्ध, तो देश समृद्ध। जिन आधारों पर हम एक गांव की जीडीपी को बढ़ाकर, देश की जीडीपी को बढ़ाने का काम करेंगे। जो इस प्रकार से होगा : परिवारिक बीमा एवं सुरक्षा लाभ: आर्थिक आधार पर बीमा सुरक्षा लाभ देश के प्रत्येक नागरिक को दिया जायेगा। जिसके अंतर्गत 2.50 लाख तक वार्षिक आय प्राप्त करने वाले सभी परिवारों को 15 लाख रूपए तक की नि:शुल्क चिकित्सा लाभ दिया जाएगा। गंभीर बीमारी एवं यात्रा आदि के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को 15 लाख तक आर्थिक लाभ दिया जाएगा। आरक्षण और सरक्षण : हमारी सरकार आरक्षण और सरक्षण दोनों के पक्षधर है, लेकिन निम्न क्षेत्रों में हम आरक्षण न देकर समयावधि को बढ़ाएंगे। जैसे : डॉक्टर, इंजीनियर और अध्यापन के क्षेत्रों में हम आरक्षण देने का विरोध करते है। इसके लिए हम इन क्षेत्रो में प्रतियोगी के उम्र की समयावधि को 35 वर्ष करेंगे। इसप्रकार जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवार है, उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, खाद्य पदार्थों में भरी छूट या निःशुल्क दिया जायेगा, जिससे वे माध्यम वर्ग की श्रेणी में आ सके। महिला सशक्तिकरण जन सहायता पेंशन लाभ हमारी सरकार देश के सभी नागरिकों को पेंशन लाभ देगी। प्रथमतः सरकारी पेंशन को पुनः बहाल करेगी। दूसरा: 2.5 लाख तक वार्षिक आय प्राप्त करने वाले हर नागरिकों को 60 वर्ष उपरान्त रुपया 15 हजार तक पेंशन लाभ दिया जायेगा। कानून व्यवस्थाओं का आधुनिक प्रबंधन: ऑनलाइन एफ़आईआर प्रबंधन : वर्तमान में ऑनलाइन एफ़आईआर का प्रावधान है, जटिल प्रक्रिया होने के कारण इसका उपयोग सही ढंग से लोग नहीं कर पाते है, जिसे बहुत ही सरल बनाया जायेगा। जिससे कोई भी व्यक्ति घटना स्थल की वास्तविक स्थिति को बोलकर वीडियो रिकार्ड के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकेगा। फ़र्ज़ी मुक़द्दमों का आधुनिक प्रबंधन : हमारे यहाँ ज्यादा तर मुकद्दमे भूमि विवाद को लेकर होते है और फौजदारी तक चले जाते है। ऐसे तमाम मामलों का हल हमारी भारतीय पहचान प्रणाली से स्वतः ख़त्म हो जायेंगे क्योंकि फर्जी दस्तावेजों से भरे मामले स्पष्ट होंगे। मुक़द्दमों की सुनवाई का आधुनिक प्रबंधन: मुक़द्दमों की तारीख ऑनलाइन प्रणाली पर होगा। जिससे वादी-प्रतिवादी को उनके मोबाइल पर सूचनाएँ प्रदान की जाएगी। स्थानीय स्तर के किसी वादी - प्रतिवादी को हाईकोर्ट या सुप्रिमकोर्ट जाने की कोई आवश्यकता नही होगी। आधुनिक प्रणाली में वादी-प्रतिवादी अपने अधिवक्ता को ऑनलाइन हॉयर कर सकता है। कोर्ट मुक़द्दमों को स्थानीय कोर्ट से ही सुनवाई हेतु ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से कर सकेगा। लाइव ईवीएम :- हमारा वर्तमान ईवीएम को समाप्त कर लाइव ईवीएम लाने का प्रस्ताव है, जिससे देश में मतदान एवं मत-गणना एक साथ हो सकें। इस प्रणाली से मतदाता निर्वाचन क्षेत्र से बहार भारत के किसी क्षेत्र में रहकर अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को मतदान कर सकेगा। इस प्रणाली में मतदाता सूचि में फेरबदल और फर्जी मतदान की संभावना समाप्त होगा। मतदाता सरल प्रक्रिया द्वारा स्वयं की पुष्टि आधार पर मतदान कर पायेगा। लाइव ईवीएम प्रणाली आने से देश का हर नागरिक जो देश की तमाम सेवा और सुरक्षा से जुड़े है, मतदान कर सकेंगे। इसप्रकार योग्य लोगो द्वारा मतदान की संभावना 99 प्रतिशत तक बढ़ेगी। इस प्रणाली द्वारा कम से कम खर्च में एक साथ मतदान कराए जा सकेंगे। जिसमें कर्मचारी अधिकारीयों की फेरबदल न के बराबर होगा। लाइव ईवीएम प्रणाली आने पर हम देश में “राईट टू रिकॉल” का अधिकार मतदाता को दे सकेंगे, जिससे लोकतंत्र के भ्रष्टाचार पर विराम लग सके और विकास की गति को बल मिलेगा। यातायात एवं वाहन लाइसेंस : समस्या : आज सड़क दुर्घटना एक आम बात हो गई है, जिसका सबसे बड़ा कारण भ्रष्ट वाहन लाइसेंस प्रणाली है, यह कहना कि लाइसेंस प्रणाली ऑनलाइन हो गई है, लेकिन इसमें भ्रष्टाचार बढ़ गया है, जहां जमीनी स्तर पर कोई विशेष प्रशिक्षण प्रणाली नहीं है, लेकिन ऑनलाइन टेस्ट के डर से व्यक्ति एजेंटों, कर्मचारियों को रिश्वत देकर लाइसेंस बनवाने की कोशिश करता है। जिसे न तो गाड़ी चलाने का उचित प्रशिक्षण मिला है और न ही सड़क नियमों का ज्ञान है और यह प्रक्रिया एक दिन में संभव नहीं हो सकती। जो भ्रष्टाचार और सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण है। सरकार दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तमाम प्रकार के भारी भरकम जुर्माना थोपकर यातायात जागरूकता शिविरों द्वारा नियंत्रित करने के प्रयास में जुटी है, जो बहुत ही निम्न सोच को दर्शाता है, जो दुर्घटना के मूल कारणों से बिलकुल विपरीत है। समाधान : हमने सिम्युलेटर प्रणाली द्वारा इस समस्या को हल करने का प्रयास किया है, इस प्रणाली को 15 से 16 वर्ष की आयु के पुरुष/महिला किसी भी सिम्युलेटर सेण्टर पर बाइक, कार, बस, ट्रक आदि वाहन चलाना सीख सकता है। इसप्रकार व्यक्ति के 18 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत एक सरल पुष्टि आधार पर वाहन लाइसेंस संख्या प्राप्त कर सकेगा। जिसमे प्रतिभागी को तीन तरह के रोडमैप के अनुसार प्रशिक्षण देने होंगे, जैसे: शहर, राज्य और केंद्रीय स्तर के क्षेत्रों में वाहन चलाने का अधिकार होगा। इस प्रणाली में जो व्यक्ति लाइसेंस प्राप्त करेगा, वही वाहन चला पायेगा, इसकी तकनीकी विकसित हो चुकी है। हमारे यहाँ एक वाहन को कई लोग चलाते है, जिसे हमने रिफ्रेंस प्रणाली में बंटा है, जिसके तहत वाहन मालिक रिफरल द्वारा वाहन चलाने का परमिशन दे सकेगा। इस प्रकार मार्ग दुर्घटना, अपराध और चोरी होने की दशा में व्यक्ति का स्पष्टीकरण त्वरित किया जा सकेगा। पर्यावरण का आधुनिक प्रबंधनः जल संरक्षण का आधुनिक प्रबंधन : हमने भूमिगत जल संरक्षण के लिए फ़िल्टर ट्यूब प्रणाली द्वारा जल को भूमिगत करने की रूपरेखा को तैयार किया है, जिससे भूमिगत जल की समस्या समाप्त होगी। जल जमाव को रोका जा सकेगा, नदियों में मिलने वाले नगर के गंदे जल को कम किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ के स्तर में कमी लाया जा सकेगा। वायु प्रदूषण प्रबंधन : हम प्रतिव्यक्ति एक पेड़ अभियान चला रहे है और हर पेड़ के आंकड़े स्पष्ट हो इसके लिए हम माय ट्री नाम से एक एप भी जारी किया है, जिसके तहत लगाए गए पेड़ों की स्थिति को देखा जा सकता है, जिसकी मॉनिटरिंग करके हम समय समय पर देखभाल भी कर सकते है। साथ ही हम इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देंगे और पुराने संसाधनों को नए तकनीकी से जोड़ा जायेगा, जो प्रदूषण मुक्त मानकों पर बना हो। गाय की महत्ता के आधार पर उद्योगों को विस्तारित करना : सर्वप्रथम गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना। व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो गाय ऐसा प्राणी है, जिससे प्राप्त होने वाला कोई भी तत्व बेकार नही होता। इस प्रकार हम देखते है कि गाय के दूध, मुत्र, और गोबर तीनों अमृत तुल्य है, जिसमें व्यवसाय की अपार संभावनाएं व्याप्त है। हमारी सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ब्लाक, तह-सील एवं जिले स्तर पर गाय हेतु चारागाह के साथ उद्योग स्थापित करना, जिससे देश में फिर से दुग्ध क्रांति लाया जा सके। इस व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार एवं रोज़गार की अपार संभावनाएं बनाई जा सकेंगी। युवा सशक्तिकरण हेतु आधुनिक प्रबंधन: व्यवस्थाओं का आधुनिक प्रबंधन: हमारी सरकार में मूल व्यवस्थाओं जैसे सड़क, पानी विद्युत, गैस कनेक्सन आदि छोटी-बड़ी समस्याओं के निस्तरण को ऑनकाल प्रावधान द्वारा करेगी। मुद्दो का समर्थन : ।। हमारा संकल्प ।। सेवा! सानिध्य! समपर्ण!! जय हिन्द! जय भारत! जय राष्ट्रवाद!!लोकसभा चुनाव - 2019
समाधान विकल्प
भारतीय पहचान संख्याः
परिवारिक बीमा एवं सुरक्षा लाभ
कृषि के आधुनिक प्रबंधन
शिक्षा का आधुनिक प्रबंधन
चिकित्सा लाभ का आधुनिक प्रबंधन:
श्रम एवं रोजगार प्रबंधन:
शिक्षित बेरोजगार के रोजगार हेतु आधुनिक प्रबंधनः
रेल परिवहन का आधुनिक प्रबंधनः
कानून व्यवस्थाओं का आधुनिक प्रबंधनः
पर्यावरण का आधुनिक प्रबंधनः
आर्थिक आधार पर आरक्षणः
मुद्दो का समर्थन:
व्यवस्था प्रदान करने वाले विकास कार्यो का आधुनिक प्रबंधन:
युवा सशक्तिकरण हेतु आधुनिक प्रबंधन:
हमारा प्रस्ताव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव - 2022
लोकसभा चुनाव - 2024